
पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 28 अक्टूबर। लोकआस्था और सूर्योपासना का महापर्व छठ अस्ताचलगामी और उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पण के साथ संपन्न हो गया। शनिवार कार्तिक शुक्ल चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से शुरू चार दिवसीय पर्व की इतिश्री मंगलवार कार्तिक शुक्ल सप्तमी तिथि को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पण के साथ हुई। कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को छठव्रतियों ने गंगा नदी सहित अन्य नदियों या घरों में नहा धोकर अरवा चावल, चना का दाल, लौकी एवं गोभी की सब्जी, तरह-तरह का बजका, चटनी आदि खाया और अपने परिजनों, सगे- संबंधियों एवं मित्रों को खिलाया। कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को छठव्रतियों ने पूरे दिन व्रत रहकर शाम मे नहा-धोकर खरना का पूजा किया और गुड़ का खीर एवं रोटी का प्रसाद चढ़ाया।

कई परिवारों मे रोटी की जगह पूङी एवं केला भी प्रसाद के रूप मे चढ़ाने का प्रचलन है। प्रसाद चढ़ाने के बाद छठव्रतियों ने अपने परिजनों, सगे-संबंधियों एवं मित्रों को प्रसाद खिलाया। उसके बाद निर्जला व्रत रहकर छठव्रतियों ने कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को शाम मे नदी, तालाब, आहर या पोखर के पानी मे खङा होकर सूप में दीया, ठेकुआ सहित तरह-तरह का फल लेकर अस्ताचलगामी सूर्य और कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। बिहार विधान सभा चुनाव 2025 के प्रत्याशी भी कई छठव्रतियों के घर जाकर छठ पर्व मे शामिल हुए और छठ की शुभकामना दी।

बिहार के बाहर नौकरी करने वाले बड़ी संख्या में लोग छठ पर्व पर अपने घर एवं गाँव आये। लोगों ने खुशी-खुशी छठ पर्व मनाया। बिहार के बाहर रहने वाले अनेकों लोगों ने अपने कार्यस्थल पर अलग-अलग जगहों पर छठ पर्व पूरे उत्साह के साथ खुशनुमा माहौल मे मनाया। बिहार के बाहर अन्य राज्यों एवं देशों मे भी बिहार के लोग अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संजोये हुए हैं।
