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पटना: दस दिवसीय बिहार सरस मेले का हुआ समापन।

RKTV NEWS/पटना(बिहार)21सितंबर।सदियों वर्ष पुरानी हस्तशिल्प . लोक कलाएं और कलाकृतियों को एक बार फिर से स्थापित करते हुए दस दिवसीय बिहार सरस मेला का रविवार को समापन हो गया l सरस मेला में हर उम्र, हर वर्ग और हर तबके के बीच हस्तशिल्प के प्रति दीवानगी देहते ही बनी l देश लेकर विदेश तक हस्तशिल्प का परचम लहराया और आगंतुकों ने आयोजन और हस्तशिल्प के प्रोत्साहन एवं संरक्षण की तारीफ़ की l
दस दिन में लगभग 3 करोड़ 68 लाख रूपये के उत्पादों एवं खाद्य पदार्थो की खरीद -बिक्री हुई l ढाई लाख से अधिक लोग आये l सबसे ज्यादा हस्तनिर्मित परिधानों एवं देशी खाद्य पदार्थों की बिक्री हुई l
ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन एवं उससे जुड़े महिला उद्यमियों को संरक्षण , स्वावलंबन और सशक्त बनाने के उद्देश्य से वर्तमान वित्तीय वर्ष का बिहार सरस मेला का प्रथम संस्करण 12 सितंबर से 21 सितंबर 2025 तक ग्रामीण विकास विभाग के तत्वाधान में जीविका द्वारा आयोजित किया गया l सरस मेला का द्वितीय संस्करण 12 दिसंबर से 28 दिसंबर 2025 तक गाँधी मैदान, पटना में आयोजित किया जायेगा l
सरस मेला वर्ष 20१४ से बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति , जीविका द्वारा प्रति वर्ष आयोजित किया जाता है l हस्तशिल्प एवं देशी व्यंजनों के प्रति लोगों के बढ़ते हुए आकर्षण को देखते हुए वर्ष 2018 से बिहार सरस मेला प्रति वर्ष दो संस्करण में आयोजित किया जाता है l
दस दिवसीय सरस मेला में बिहार समेत झारखण्ड, ओड़िसा, आसाम, मणिपुर , पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र , आँध्रप्रदेश एवं उत्तराखंड से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी महिला उद्यमियों के स्टॉल पर हस्तशिल्प , लोक कला एवं देशी व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई l कुल 130 स्टॉल पर 22 राज्यों की हस्तशिल्प, लोक कला, स्वाद, संवाद एवं संस्कृति प्रदर्शित की गई l
बिहार से सभी 38 जिलों से स्वयं सहायता समूह की महिला उद्यमियों ने शिरकत की और अपने-अपने क्षेत्र के लोक शिल्प एवं व्यंजनों की प्रदर्शनी सह बिक्री कर आगंतुकों को बिहार की समृद्ध लोक कला , परंपरा , स्वाद एवं संस्कृति से अवगत कराया l समूह से माध्यम से महिला सशक्तिकरण एवं स्वावलंबन की दिशा में हुई अभूतपूर्व प्रगति भी प्रदर्शित हुई l ग्रामीण शिल्प और कलाकृतियों के कद्रदान सरस मेला में लगे देशी उत्पाद को अपने पसंद एवं जरुरत के हिसाब से ख़रीदा l युवा पीढ़ी अपने देश की सदियों पुरानी संस्कृति, शिल्प एवं स्वाद से भी परिचित हुई l प्रबंधन एवं फैशन टेक्नोलॉजी से जुड़े छात्र-छात्राओं ने ग्रामीण उद्यमियों से व्यवसाय प्रबंधन का गुर सीखा l विदेशी सैलानियों को भी बिहार की हस्तशिल्प एम् मधुबनी पेंटिंग ने आकर्षित किया l
बिहार से सिक्की कला, मधुबनी पेंटिंग, सीप से बने शर्ट-पैंट, सूट आदि के बटन, माला, कान बाली, हाथ की बाला, पावजेब और शंख इत्यादि लोगों को बरबस ही रिझाते रहे l वहीँ घास , बालू , लकड़ी के बुरादा आदि से बनी कलाकृतियाँ, लहठी, चूड़ियां, खादी के परिधान , कास्यं, पीतल, पत्थर,घास एवं जुट आदि से बनी कलाकृतियाँ, दरी-कालीन, चादर , रसोई घर के सामान और बचपने के खिलौने, बांस एवं जुट से बने उत्पाद, सिक्की कला, मधुबनी पेंटिंग, फुलकारी कला, बुटिक प्रिंट की साड़िया , अहीर कला, तंजोर कला, कच्छ कला, सिक्की कला, बम्बू कला, कलमकारी, अदिवा, हैडलूम समेत हैंडीक्राफ्ट के अंतर्गत आनेवाली विभिन्न कलाओं के तहत निर्मित उत्पादों की जमकर खरीद-बिक्री हुई l
जीविका दीदी द्वारा संचालित दीदी की रसोई समेत अन्य स्टॉल से देशी, शुद्ध, स्वादिष्ट एवं पौष्टिक व्यंजनों का स्वाद के शौकिनो ने लुत्फ़ उठाया लिट्टी चोखा, ढोकला, दही बड़ा, चुडा घुघनी , मक्का मसाला, लस्सी, आलू चाप, रसगुल्ला और गुलाबजामुन जैसे मिठाइयों एवं व्यंजनों का लुत्फ़ आगंतुकों ने उठाया l दस दिन में सवा लाख से अधिक के व्यंजनों का लुत्फ़ आगंतुकों ने उठाया और घर के लिए भी ले गए l
सम्पूर्ण बिहार की लोक कला को अपने अंदर समेटे और हुनरमंद शिल्पकारों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली एवं जीविका दीदियों द्वारा संचालित शिल्प ग्राम महिला उत्पादन कंपनी लिमिटेड के स्टॉल पर जीविका दीदियों ने आत्मनिर्भरता की झलक पेश की l शिल्प ग्राम के स्टॉल पर सिक्की कला से बने उत्लाद , मधुबनी पेंटिंग से उकेरी गयी तस्वीरों से बनी साड़ियाँ, सिल्क के धागा से बनी साड़ियाँ, दुपट्टे, स्टोल ,टसर सिल्क, पेपर सिल्क एवं खादी -कॉटन से बने परिधान आगंतुकों के लिए आकर्षण के खास केंद्र बने रहे l दस दिनों में सवा लाख से अधिक के परिधान एवं कलाकृतियों की बिक्री हुई l
जीविका दीदी द्वारा उत्पादित उच्च गुणवत्तापूर्ण शहद मधुग्राम महिला उत्पादक कंपनी लि.के स्टॉल पर बिक्री हेतु प्रदर्शित की गई l इस स्टॉल से आगंतुकों को शहद के विभिन्न फ्लेवर यथा तुलसी शहद, लीची शहद, सरसों शहद, करंच, युकोलिप्टस , वन तुलसी , सहजन और जामुन एवं अन्य फ्लेवर के बारे में भी बताया जाता रहा l दस दिनों में एक लाख से अधिक की राशी के मधु की बिक्री हुई है l
बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी एवं बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका द्वारा सतत जीविकोपार्जन योजना के सफल क्रियान्वयन और उससे लाभान्वित हुए परिवारों के आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति की बानगी प्रदर्शित की गई l लाभान्वित परिवारों द्वारा उत्पादित विभिन्न कलाओं के अंतर्गत कसीदाकारी की हुई हस्तशिल्प , सिक्की एवं बांस से बनी चूड़ियाँ, टेडी बियर, बांस से निर्मित उत्पाद समेत घर – दुकान और कार्यालय सजावट के सामानों की बिक्री करते हुए खुद जीविका दीदियों ने अपने सशक्तिकरण एवं स्वावलंबन की कहानी भी बयां की।बिहार राज्य के भोजपुर जिला अंतर्गत कोइलवर प्रखंड में जीविका दीदियों द्वारा गठित जानकी जीविका महिला सिलाई उत्पादन कंपनी लिमिटेड ने भी जीविका से जुडी गाँव की डेढ़ सौ से अधिक महिलाओं को सिलाई-कटाई में प्रशिक्षित कर रोजगार उपलब्ध कराया गया है l इस कंपनी से स्कुल ड्रेस, सलवार सूट, लैब कोट, ब्लाउज, गाउन, पेटीकोट, प्लाजो, स्कर्ट, बैग, झोला आदि का निर्माण एवं बिक्री किया जा रहा है l सरस मेला में जानकी जीविका महिला सिलाई उत्पादन कंपनी लिमिटेड के स्टॉल से 10 दिनों में 80 हजार से अधिक के परिधानों की खरीद बिक्री हुई है l सबसे ज्यादा नाइटी एवं कुर्ती की बिक्री हुई है l इस स्टॉल पर बिहार के हुनरमंद महिलाओं ने महिला स्वावलंबन एवं सशक्तिकरण के साथ ही कुशल व्यवसाय प्रबंधन की नाज़िर पेश की।महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड , किशनगंज में जीविका दीदियों के चाय बगान में उत्पादित चाय की सरस मेला में खूब बिक्री हुई l आगंतुक पहले टेस्ट करने के लिए घर ले गए और अगले दिन आकर किलो में ले गए l दस दिनों में 80 हजार रुपये से अधिक की चाय की खरीद-बिक्री हुई l
जीविका दीदियों द्वारा संचालित शुरू जीविका महिला बैग उत्पादक समूह, मुज्जफ्फरपुर के स्टॉल से भी बैग, झोला, पर्स, लैपटॉप बैग, जुट थैला , शौपिंग बैग, फाइल फोल्डर आदि की खूब बिक्री हुई l दस दिन में अनुमानतः ढाई लाख रुपये से अधिक की बिक्री हुई l
सरस मेला परिसर में स्वच्छता का अनुपालन करते हुए आगंतुकों का खास ध्यान रखा गया l हेल्प डेस्क और स्वास्थ्य डेस्क भी उपलब्ध कराये गए थे l सेल्फी जोन के कई स्थल भी आकर्षण के केंद्र रहे l स्टॉल प्रबंधन का कार्य भी स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिलाओं ने खुद संभाल रखा था l
कैशलेश खरीद-बिक्री को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरस मेला परिसर में जीविका दीदियों द्वारा 2 ग्राहक सेवा केंद्र संचालित किया गया l यहाँ से आगंतुक रुपये की निकासी करके खरीददारी कर रहे हैं वही स्टॉल धारक बिक्री के पश्चात इकठ्ठा हुए राशी को ग्राहक सेवा केंद्र के माध्यम से अपने खाता में जमा भी करते रहे।
मेला के एक विशेष भाग में आगंतुकों के लिए खाने-पीने के स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ़ उठाने का अवसर भी प्रदान किया गया है l जहाँ बिहार समेत अन्य राज्यों के भी देशी मिठाइयाँ एवं व्यंजन उपलब्ध रहे l रोहतास की गोड़ई मिठाई, बाढ़ जिले का पेड़ा और लाइ, सुपौल का खाजा, पटना का चनाजोर गरम, किसान चाची का मशहूर अचार ,रसमलाई, टिक्की चाट, माल पुआ, चन्द्र कला, मुंग दाल की पकौड़ी , पिपरा का खाजा, पापड़ी चाट, बटाटा पुड़ी, भेल पुड़ी, बालू शाही, खुरमा , मकई का लड्डू और दाल बाटी सभी एक ही छत के नीचे विभिन्न स्टॉल पर परोसे गए l अश्वगंधा का लड्डू , त्रिफला लड्डू समेत 16 प्रकार के और्गेनिक लड्डू, विभिन्न प्रकार के मसाले , जिंक युक्त आटा , मल्टीग्रेन आटा , मडुआ का आटा , बाज़रा का आता, मक्का आटा, कतरनी चावल एवं चुडा, सत्तू , बेसन, अदवरी, दनवरी, पापड़ आदि समेत विभिन्न राज्यों के देशी व्यंजनों की खूब खरीददारी हुई l कालीन , रग्स, चादर , दोहर, उनी कपडे ,खादी, सिल्क औए सूती से बने परिधान का अपना अलग ही क्रेज रहा l
समापन के अवसर पर सर्वश्रेष्ठ बिक्री करने वाली स्टॉल धारकों समेत अन्य स्टॉल धारकों और आयोजन से जुड़े सदस्यों को प्रशस्ति –पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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