
भोपाल/मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद) 21 सितम्बर। मध्यप्रदेश के राजधानी भोपाल में न्यू भूमिका साहित्यिक संस्था द्वारा होटल मयूर पैलेस में “कथा कुंभ” का वृहद आयोजन किया गया जिसमें शहर के प्रमुख कहानीकारों ने अपनी कहानियों का पाठ किया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ कैलाश चंद्र शर्मा द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया।
कार्यक्रम का संचालन चंद्रभान राही एवं सुरेश पटवा द्वारा किया गए। कार्यक्रम की मुख्य विशेषता यह थी कि इसमें कोई भी अध्यक्ष और मुख्य अतिथि न होकर सभी सम्मानित कथाकारों को बारी बारी से अतिथि के रूप में मंचासीन किया गया। विवेक रंजन श्रीवास्तव ने कहानी “पेंशन वाला मोबाइल” का पाठ किया जिसमें एक पेंशनर्स हाजी मियां से बेटों के कपटपूर्ण व्यवहार को विषय बनाया गया। अंत में वे हज करने चले जाते हैं।
इकबाल मसूद ने कहानी जल समाधि का पाठ किया जिसका सार था कि समाज अपनी इज्जत बचाने के लिए स्त्री को कुर्बान कर देता है। मनोरमा पंत ने कहानी “ठंडी औरतें” पढ़ी जो नारी विमर्श पर केंद्रित थी।
सुरेश पटवा ने हास्य व्यंग्य से परिपूर्ण कहानी “छिद्दी का बकरी लोन” पढ़ी जिसमें एक आदिवासी गोंड बैंक से बकरी के लिए लोन लेने की कोशिश में कितने पापड़ बेलता है और बैंक कैसे तरह तरह के बहाने बनाकर लोन निरस्त कर देती है। अरूण अरणव खरे की
कहानी “गुडमॉरिंग आर.ए.सी.” रोचक कहानी है जिसमें ट्रेन में मिले लड़की और लड़के की कथा है।
गोकुल सोनी की कहानी “मन्नत” में दो पहाड़ी गांव के गरीब मित्रों के जीवन की एक ही सबसे बड़ी इच्छा होती है कि वे एक बार कार में बैठें वे इस हेतु देवस्थान पर मन्नत का धागा बांधते हैं परंतु यह मन्नत तभी पूरी होती है जब एक मित्र की मृत्यु हो जाती है और वे एंबुलेंस में घर आते हैं।
चरणजीत सिंह कुकरेजा की कहानी “तमाचा” में जब लड़की के पिता का आत्मीय मित्र उसे छेड़ता है तो पिता क्रोध न करके उसी के हाथों लड़की का कन्यादान कराता है। शोभा जोशी की कहानी “बिंदी”, वर्षा श्रीवास्तव की
कहानी “संस्कारों का अग्निकुंड,” वीणा विद्या गुप्ता की कहानी एक पहचान और रूपाली सक्सेना की कहानियां भी प्रभावशाली रही।
संस्था अध्यक्ष रमेश नन्द की कहानी औलाद बुजुर्गों से बेटे बहू के दुर्व्यवहार पर आधारित प्रभावी कथा रही। अशोक कुमार धमेंनियां की कहानी “विप्र और श्यामा” दान की बछिया पंडित को देकर वापस लेने की कथा है।
संस्था सचिव चन्द्र भान “राही” की
कहानी बहू द्वारा सास ससुर से दुर्व्यवहार और उनको वृद्धाश्रम भिजवा देने की मार्मिक कथा है।
डॉ. अनिता सिंह चौहान की कहानी “जवाब” बताती है कि अकेली लडकी को समाज कैसे परेशान करता है पर आज की लडकी मजबूत है।
अंत में एस डी श्रीवास्तव ने सभी कहानियों पर सार्थक टिप्पणी दी एवं अवनींद्र खरे ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में गीतकार ऋषि श्रृंगारी सहित अनेकों श्रोता मौजूद रहे।
