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अभिनेता, निर्देशक और निर्माता मोहनलाल को भारतीय सिनेमा में उनके विशिष्ट योगदान के लिए 71वें राष्ट्रीय पुरस्कारों के दौरान वर्ष 2023 के दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

RKTV NEWS/नई दिल्ली 20 सितंबर।दादा साहब फाल्के पुरस्कार चयन समिति की सिफारिश पर, भारत सरकार ने आज घोषणा की कि श्री मोहनलाल को वर्ष 2023 के लिए प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। महान अभिनेता, निर्देशक और निर्माता को भारतीय सिनेमा में उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया जा रहा है। यह पुरस्कार उन्हें 23 सितंबर, 2025 को 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में प्रदान किया जाएगा।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण, रेलवे और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज भारतीय सिनेमा में श्री मोहनलाल के असाधारण योगदान के सम्मान में पुरस्कार की घोषणा करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की।
मोहनलाल की उल्लेखनीय सिनेमा यात्रा पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। उनकी बेजोड़ एवं बहुमुखी प्रतिभा और निरंतर कड़ी मेहनत ने भारतीय फिल्म इतिहास में स्वर्णिम मानक स्थापित किया है।

 मोहनलाल के विषय में

मोहनलाल विश्वनाथन नायर (जन्म 21 मई 1960, केरल) एक प्रशंसित भारतीय अभिनेता, निर्माता और पार्श्व गायक हैं, जिन्हें मलयालम सिनेमा में उनके काम के लिए जाना जाता है। वह व्यापक रूप से एक “पूर्ण अभिनेता” के रूप में जाने जाते हैं। लगभग पांच दशकों के अपने करियर में वह 360 से अधिक फिल्मों में दिखाई दिए हैं, जिन्होंने किरीडम, भारतम, वानप्रस्थम, दृश्यम और ऐसी अन्य कई फिल्में हैं जिनमें उन्होंने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है।
मोहनलाल ने भारत और विदेश में कई अन्य सम्मानों के साथ पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और केरल में कई राज्य फिल्म पुरस्कार जीते हैं। 1999 में उनकी फिल्म वानप्रस्थम कान्स अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित हुई, जिससे उन्हें अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली।
सिनेमा के अलावा, उन्हें 2009 में भारतीय प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में नियुक्त किया गया था। भारत सरकार द्वारा उन्हें 2001 में पद्मश्री और 2019 में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया है। आज, मोहनलाल भारत के सबसे सम्मानित सांस्कृतिक प्रतीकों में से एक हैं, जिन्हें उनकी बहुमुखी प्रतिभा, विनम्रता और विश्व सिनेमा में उनके स्थायी योगदान के लिए सराहा जाता है।

दादा साहब फाल्के पुरस्कार के विषय में

भारतीय सिनेमा में दादासाहेब फाल्के के योगदान को याद करने के लिए भारत सरकार ने 1969 में देविका रानी को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया था, जिन्होंने 1913 में भारत की पहली फुल-लेंथ फीचर फिल्म, राजा हरिश्चंद्र का निर्देशन किया था। सिनेमा के क्षेत्र में सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित पुरस्कार विजेताओं को ‘भारतीय सिनेमा के विकास और प्रगति में उनके उत्कृष्ट योगदान’ के लिए सम्मानित किया जाता है। इस पुरस्कार में एक स्वर्ण कमल पदक, एक शॉल और 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है।

दादा साहब फाल्के पुरस्कार चयन समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल थे:

मिथुन चक्रवर्ती
शंकर महादेवन
आशुतोष गोवारिकर

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