विलुप्त हो रही हस्तशिल्प कला मेले द्वारा हुई पुनर्स्थापित,बढ़ रही मांग।

महिला उद्यमियों के व्यवसाय में निरंतर हो रही वृद्धि।

पैसों की जमा निकासी को ले” ग्राहक सेवा केंद्र “है स्थापित।

संगीत के माध्यम से कलाकार आगंतुकों का कर रहे भरपूर मनोरंजन।

कैश लेश खरीदारी की भी है पूर्ण सुविधा।
RKTV NEWS/पटना (बिहार )17 सितंबर।बिहार सरस मेला में पांच दिन में खरीद-बिक्री का आंकड़ा डेढ़ करोड़ पहुंच गया है ।अब तक डेढ़ लाख से अधिक हस्तशिल्प के कद्रदान मेला में आ चुके हैं। मंगलवार 16 सितम्बर को लगभग 33 लाख 87 हजार रुपये के उत्पादों एवं खाद्य पदार्थों की खरीद-बिक्री हुई है l बुधवार को भी आगंतुकों की संख्या में वृद्धि हुई l
ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से बिहार सरस मेला ज्ञान भवन, पटना में 12 से 21 सितम्बर 2025 तक आयोजित है l वर्तमान वित्त्तीय वर्ष का यह प्रथम संस्करण अपने आयोजन का आधा सफ़र तय कर चुका है l लिहाजा हस्तशिल्प के तहत उत्पादित कलाकृतियों की खरीद-बिक्री जमकर हो रही है l शुद्ध देशी एवं पारंपरिक कलाकृतियाँ आगंतुकों को सहज ही लुभा रही है l और इसके कद्रदान उन्हें ख़रीदे बगैर नहीं रह पा रहे हैं l कमोवेश यही स्थिति देशी व्यंजनों के साथ भी है l सुस्वादु, विभिन्न प्रदेशों के खाद्य पदार्थ का आनंद सभी उठा रहे हैं l जीविका दीदी की रसोई से प्रतिदिन 20 हजार रुपये से अधिक के देशी, शुद्ध एवं पौष्टिक व्यंजनों की खरीद-बिक्री हो रही है l इसके साथ ही बिहार समेत 22 राज्यों के मशहूर देशी मिठाइयाँ एवं व्यंजन लोगों को लुभा रहे हैं l
सरस मेला में सुसज्जित सभी 130 स्टॉल आधुनिक तकनीक और पूरी तरह डिजिटल हैं l सभी स्टॉल पर कैशलेश खरीददारी की सुविधा उपलब्ध है l आगंतुक कैशलेश खरीददारी भी कर रहे हैं l वहीँ जीविका दीदियों द्वारा सरस मेला परिसर में दो ग्राहक सेवा केंद्र भी संचालित किये जा रहे हैं l बिक्री के पश्चात स्टॉल धारक ग्राहक सेवा केंद्र पर अपनी राशि जमा कर रहे हैं l ग्राहक सेवा केंद्र पर भी प्रतिदिन अमूमन 50 हजार रुपये से अधिक की राशी जमा हो रही है l ग्राहक सेवा केंद्र से रुपियों की निकासी भी हो रही है l
बुधवार की शाम सरस मंच पर जाकिर गिटार क्लासेस के कलाकारों ने आधुनिक वाद्य यंत्रो के माध्यम से पुरानी गीतों की प्रस्तुति की l
22 राज्यों की स्वयं सहायता समूह से जुडी ग्रामीण महिला उद्यमी आगंतुकों को स्वाद, संस्कृति, परंपरा, हस्तशिल्प एवं कलाकृतियों से रूबरू करा रही हैं और यह बता रही हैं कि अपेक्षाकृत कम पढ़े –लिखे होने के बावजूद संघर्ष, साहस , शक्ति एवं ज़ज्बा से सफलता मिलना तय है l कुछ कर कर गुजरने की चाहत लिए ग्रामीण महिलाएं अपने-अपने घर से बहार निकली और अब राष्ट्रीय पटल पर कुशल महिला उद्यमी के तौर पर स्थापित हैं l
हस्तशिल्प अब अपने विलुप्तता के काल से बाहर निकलकर सरस मेला के माध्यम से स्थापित हो चुकी है l हस्त्शिल्प के इस सबसे बड़े बाज़ार में शिल्प और कलाकृतियों का जीवंत निर्माण एवं प्रदर्शन भी कई स्टॉल जारी है l आधुनिक बाज़ार से इतर ग्रामीण शिल्प को प्रोत्साहित करता हुआ बिहार सरस मेला के प्रति आगंतुकों का क्रेज देखते ही बन रहा है।

