
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)07 सितंबर। शनिवार को श्री दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर में विराजमान मुनि श्री 108 विशल्यसागर जी महाराज ने पर्युषण महापर्व के अंतिम दिवस शनिवार को अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए बोले कि अनन्त कर्मो की निर्जरा कर अनंत पुण्य का आश्रव ही अनंत चतुर्दशी है। अनंत शब्द का साधारण शाब्दिक अर्थ जिसे गिना नहीं जा सकता अर्थात जिसकी गिनती नहीं हो सकती। जैन धर्म मे अनंत शब्द से आशय यह भी है कि अनंतानुबंधी कषायों का शमन कर, अनंत पुण्य का अर्जन करना। इस दिवस उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म का पालन किया जाना। जैन श्रावक श्राविकाओं के द्वारा व्रत-उपवास आदि रखने की परंपरा रही है। अनंत चतुर्दशी अहिंसा, सत्य और क्षमा जैसे जैन धर्म के मूल मूल्यों को सुदृढ़ करता है। उन्होंने बताया कि कौशल देश में सोम शर्मा नामक एक गुणवान ब्राह्मण रहता था। इसकी सोमिल्या नाम की स्त्री थी, इस ब्राह्मण ने पूर्व जन्म में पाप संचय किये थे इसलिए इसे नगर-नगर, मारा-मारा फिरना पड़ता था, किन्तु कहीं भी इसे सुख प्राप्त नहीं होता था एक बार एक स्थान पर अनन्तनाथ भगवान का समवशरण आया हुआ था। यह ब्राह्मण समवशरण में भगवान के दर्शनार्थ पहुंचा और दर्शन करके पूछने लगा- “हे भगवान ! मैने बड़े भारी पाप किए है, जिससे मुझे यह दुख उठाने पड़ रहे हैं। भगवान् ऐसा उपाय बताइये, जिससे इन दुःखों से मुझे छुटकारा मिले।’ द्विज की बात सुनकर गणधर ने उत्तर दिया- “विप्र तुम अनंत-चौदस व्रत करो” विप्र बोला-“यह व्रत कैसे किया जाता है और इसका क्या विधान है “। गणधर बोले-“भादव शुक्ला चतुर्दशी को भगवान का अभिषेक, पूजन, अनंत चतुर्दशी का व्रत करना चाहिए। गुरु की भाव-वंदना करके व्रत करना चाहिए। इस प्रकार चौदह वर्ष तक लगातार यह व्रत करने के बाद उसका उत्साह पूर्वक उद्यापन कर शास्त्र दान करें। इससे अनंत पापों का क्षय होकर, अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है। मीडिया प्रभारी निलेश कुमार जैन ने बताया कि जैन धर्म के 12 वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य का निर्वाण कल्याणक महोत्सव बड़े ही भक्तिपूर्वक मनाया गया। प्रातःसमय में जैन श्रद्धालु विभिन्न जैन मंदिरों में भगवान जिनेन्द्र प्रभु का भक्तिपूर्वक मंगलाचरण, जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, मंगल आरती, शांतिधारा, स्वयंभू स्त्रोत, भगवान वासुपूज्य की पूजा, विधान एवं निर्वाण लाडू समर्पण किए। इस अवसर पर भगवान महावीर स्वामी जल मंदिर, श्री चंद्रप्रभु मंदिर, श्री मुनिसुव्रतनाथ मंदिर, श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। संध्यासमय में शास्त्र प्रवचन, आरती, भजन, प्रश्नमंच, गुरुभक्ति, एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
