जनसुरक्षा और पशु स्वास्थ्य संरक्षण में कारगर होगा बधियाकरण एवं टीकाकरण कार्यक्रम।
बधियाकरण शल्यक्रिया से स्थानीय पशु चिकित्सकों को मिला व्यवहारिक प्रशिक्षण।

प्रशासन का संदेश – पशु भी हमारे समाज का हिस्सा, उनकी देखभाल सबकी जिम्मेदारी।
RKTV NEWS/बागपत(उत्तर प्रदेश)03 सितम्बर। जिलाधिकारी अस्मिता लाल के निर्देशन में जनपद बागपत में पशुओं के कल्याण एवं स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बिजरौल स्थित चौधरी चरण सिंह पशु पॉली क्लीनिक में पहली बार बधियाकरण की प्रक्रिया आरंभ की गई। इस क्रम में बड़ौत क्षेत्र से संरक्षित दो निराश्रित स्ट्रीट डॉग्स (एक नर एवं एक मादा) का शल्यचिकित्सा द्वारा बधियाकरण किया गया। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने स्वयं मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया एवं आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
शल्यक्रिया उपरांत नर श्वान को पाँच दिन तथा मादा श्वान को सात दिन तक चिकित्सकीय निगरानी में रखने की व्यवस्था की गई है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी रिकवरी सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से हो। बधियाकरण एक ऐसी शल्यक्रिया है जिसके माध्यम से पशुओं की जनन क्षमता को नियंत्रित किया जाता है। इससे न केवल पशुओं की अनियंत्रित संख्या वृद्धि पर रोक लगाई जा सकेगी, बल्कि पशुओं में लड़ाई-झगड़े, आक्रामक प्रवृत्ति एवं बीमारियों के प्रसार जैसी समस्याओं पर भी नियंत्रण संभव होगा।
पालतू एवं निराश्रित पशुओं का बधियाकरण केवल उनकी अनियंत्रित संख्या को नियंत्रित करने का उपाय ही नहीं है, बल्कि उनके स्वास्थ्य एवं व्यवहार सुधार में भी महत्वपूर्ण है। इसके अनेक लाभ हैं, जैसे पशुओं में स्प्रेइंग एवं मार्किंग की प्रवृत्ति में कमी आती है। आक्रामकता एवं अनियंत्रित व्यवहार में कमी होती है। पशुओं के भटकने एवं भागने की प्रवृत्ति घटती है। कैंसर एवं अन्य गंभीर रोगों का खतरा कम होता है। पालतू पशुओं की औसत आयु 3 से 5 वर्ष तक बढ़ सकती है। निराश्रित पशुओं की अत्यधिक संख्या वृद्धि पर रोक लगती है।
यदि बधियाकरण न कराया जाए तो केवल तीन वर्षों की अवधि में, और जन्म के मात्र चार माह की आयु से ही, एक नर एवं एक मादा श्वान बड़ी संख्या में बच्चों को जन्म दे सकती है। अनुमान है कि तीन वर्ष में यह संख्या सैकड़ों तक पहुँच सकती है। यह न केवल पशु कल्याण की चुनौती है, बल्कि जनहित, सफाई व्यवस्था और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए भी गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि इस शल्यचिकित्सा को गाजियाबाद से आए विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. राहुल चौधरी (सर्जन) एवं डॉ. विजय पाठक ने सफलता पूर्वक संपन्न किया। बधियाकरण उपरांत दोनों श्वान स्वस्थ एवं संरक्षित हैं और उन्हें पूर्ण चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है।
इस अवसर पर पॉली क्लीनिक पर नियुक्त डॉ. आशुतोष गुप्ता एवं अन्य चिकित्सकों में डॉ. रोहित, डॉ. त्रिभुवन यादव एवं सहयोगी कार्मिक भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षणात्मक दृष्टि से स्थानीय पशु चिकित्सकीय टीम को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया जिससे भविष्य में जनपद में ही ऐसे शल्यक्रियाओं का नियमित संचालन संभव होगा।
जिलाधिकारी ने संरक्षित पशुओं के लिए पर्याप्त आहार, स्वच्छ जल एवं समुचित देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बधियाकरण और टीकाकरण की यह संयुक्त पहल न केवल आवारा पशुओं की अनियंत्रित वृद्धि को नियंत्रित करेगी बल्कि पशुजन्य बीमारियों की रोकथाम एवं जनसुरक्षा में भी सहायक सिद्ध होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि पशु भी हमारे समाज और प्रकृति का हिस्सा हैं। उनके प्रति करुणा और जिम्मेदारी दिखाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी और संवैधानिक कर्तव्य है। सभी पशुओं के प्रति सह अस्तित्व का भाव बेहद आवश्यक है।
भविष्य में इस कार्यक्रम का विस्तार करते हुए अधिक से अधिक निराश्रित एवं आवारा पशुओं को इस योजना के अंतर्गत लाया जाएगा। साथ ही, पशुपालकों को भी अपने पालतू पशुओं का समय-समय पर टीकाकरण एवं बधियाकरण कराने हेतु प्रेरित किया जाएगा। वर्तमान में जनपद के सभी पशु चिकित्सालयों पर एंटी रेबीज टीकाकरण अभियान भी संचालित है, जिसमें सभी निराश्रित पशुओं का रेबीज टीकाकरण निःशुल्क किया जा रहा है।

