चार माह में 335 इलाज के लिए हुए भर्ती, 300 शिशु हुए पूरी तरह स्वस्थ।
RKTV NEWS/गया(बिहार )08 मई।स्वास्थ्य विभाग अपनी सही योजना, मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं और विभिन्न कवायदों से बाल मृत्यु दर को कम कर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित कर रहा है। इस प्रयास में मदर नियोनेटल केयर यूनिट का आधुनिकरण भी शामिल है। स्वास्थ्य विभाग ने मदर नियोबॉर्न केयर यूनिट को आधुनिक संसाधनों से लैस करने के साथ—साथ रेफरल सिस्टम को मजबूत किया है। नवजात के इलाज के दौरान माताओं के रहने का भी पुख्ता इंतजाम है। जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम नीलेश कुमार ने बताया कि जिला में शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए रेफरल सिस्टम को मजबूत किया गया है। कई प्रखंडों से शिशु को रेफर कर कर प्रभावती अस्पताल स्थित मदर एंड नियोनटल केयर यूनिट में इलाज के लिए भर्ती कराया जाता है। रेफरल संख्या को बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। एंबुलेंस की पर्याप्त व्यवस्था है। सभी एंबुलेंस में ट्रांसपोर्ट इक्वीवेटर उपकरण है। साथ ही पैरामेडिक भी मौजूद होते हैं। शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर विजिट को भी बढ़ाया गया है। एमएनसीयू में नवजात शिशुओं को ऑक्सीजन सपोर्ट, वार्मर, जांडिस के इलाज के लिए फोटोथेरेपी, नेबुलाइजर और जरूरत पड़ने पर वेंटिलेशन व दूसरी जरूरी सेवा दी जाती है।
चार माह में 300 शिशु हुए स्वस्थ
प्रभावती अस्पताल में मदर नियोबॉर्न केयर यूनिट में बीते चार माह में 335 शिशुओं को भर्ती किया गया। जनवरी माह में 77 शिशुओं को इलाज के लिए भर्ती किया गया। जबकि फरवरी में 82, मार्च में 84 तथा अप्रैल में 92 शिशुओं को इलाज के लिए भर्ती कराया गया। इनमें 283 शिशु जिला के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से रेुफर कर यहां आये थे। जबकि 52 शिशु का जन्म प्रभावती अस्पताल में ही हुआ था। आंकड़ों के मुताबिक 60 शिशु लड़के थे वहीं 118 शिशु लड़कियां थी। मदर नियोबॉर्न केयर यूनिट में इन सभी बच्चों को इलाज के लिए भरती किया गया। 300 शिशुओं का इलाज के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। वहीं 32 शिशुओं को बड़े स्वास्थ्य संस्थान में इलाज के लिए रेफर किया गया। जबकि एक शिशु के परिजन उसे इलाज के लिए अन्यत्र ले गये। वहीं इलाज के क्रम में दो शिशु की मृत्यु हो गयी। सबसे अधिक शिशु अप्रैल माह में इलाज के लिए भर्ती हुए। वहीं 81 नवजात इलाज के बाद वापस घर भेजे गये जबकि 10 नवजात को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया। एक शिशु की मृत्यु हो गयी।
प्रीनेटल एस्फेक्सिया के मामले सबसे अधिक
नवजात शिशुओं में प्रीनेटल एस्फेक्सिया के मामले सबसे अधिक मिले। इन चार माह में प्रीनेटल एस्फेक्सिया के 166 मामले आये। जबकि 65 मामले नियोनेटल जांडिस के थे। 34 नवजात 1800 ग्राम से कम वजन वाले थे जिनका इलाज किया गया। जबकि अन्य विभिन्न रोग के मामले थे। चंदौती से सबसे अधिक रेफर कर शिशुओं को भर्ती किया गया। मानपुर प्रखंड से 48 नवजात, खिजरसराय से 18 नवजात रेफर कर इलाज के लिए भर्ती किये गये।
क्या है प्रीनेटल एस्फेक्सिया
जन्म के समय ऑक्सीजन और रक्त प्रवाह की कमी हो प्रीनेटल एस्फेक्सिया कहा जाता है। यह मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े, किडनी और लीवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुँचा सकता है। ऑक्सीजन न लेने के कारण बच्चे के शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, शरीर में एसिड का स्तर बढ़ जाता है। यह जानलेवा हो सकता है।

