
खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 1 सितंबर। रायगढ़ में आयोजित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह 2025 में इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की कुलपति एवं देश की प्रख्यात सितार वादक प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. शर्मा ने राग सरस्वती की प्रस्तुति देकर शास्त्रीय संगीत के मधुर स्वर से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। श्रोतागण प्रस्तुति का रसपान कर खूब आनंदित हुए और अंत तक तालियां बजती रहीं। इस दौरान प्रसिद्ध तबला वादक दुर्जय भौमिक ने तबले पर संगत किया। कुलपति डॉ. शर्मा ने 15 वर्ष की आयु में श्रीमती वीणाचंद्रा से सितार वादन की शिक्षा प्राप्त की। तत्पश्चात उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध सितार वादक श्री कल्याण लहरी से उच्च प्रशिक्षण लिया। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से संगीत में स्नातकोत्तर उपाधि गोल्ड मेडल के साथ हासिल की। वहीं बड़ौदा विश्वविद्यालय से 1986 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्हें कला भूषण सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने दी लोक नृत्यों की प्रस्तुति
कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा के संरक्षण, अधिष्ठाता लोक संगीत एवं कला संकाय प्रो. डॉ. राजन यादव के मार्गदर्शन एवं सहायक प्राध्यापक लोक संगीत विभाग डॉ. दीपशिखा पटेल के निर्देशन में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा चक्रधर समारोह में लोक नृत्यों की विभिन्न प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से की गई। इसके बाद कलसा नृत्य, चटकोला नृत्य, करमा लोक नृत्य, ठिसकी नृत्य एवं सैला रीना नृत्य की प्रस्तुति दी गई। इस दौरान नृत्य पक्ष में विद्यार्थीगण टेकराम, डिम्पल पुलस्त्य, सर्वजीत बाम्बेश्वर, कु. वंदना, सिद्धार्थ दिवाकर, कु. खुशी वर्मा, डेरहू, कु. नम्रता गांवर, खगेश पैकरा, कु. हर्षलता साहू, धीरेन्द्र निषाद, कु. खुलेश्वरी पटेल तथा गायन पक्ष में डॉ. परमानंद पांडेय हारमोनियम, हर्ष चन्द्राकर, मनीष, कु. सौम्या सोनी, कु. साक्षी गढ़पायले तथा वाद्य संगत में रामचन्द्र सर्वे तबला–मांदर, डॉ. राजकुमार पटेल टिमकी, परमानंद जंघेल मांदर, खिलेश बांसुरी, करण तारम बेंजो, राजेश निषाद मंजीरा तथा सूरज कुमार सहयोगी के रूप में कार्यक्रम की प्रस्तुति दी।
