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भोजपुर: न्यूनतम मजदूरी बकाया मांग को ले मजदूरों के प्रतिनिधि मंडल ने खाद्य व आपूर्ति मंत्री लेसी सिंह से लगाई गुहार: आर डी सिंह

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)27 अगस्त।बिहार सरकार की खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लेसी सिंह से भोजपुर जिला के बिहार राज्य खाद्य निगम में काम करने वाले मजदूरों का एक प्रतिनिधिमंडल मिला तथा उन्हें एक मांग पत्र भी हस्तगत कराया। बताते चले की मंत्री का बड़हरा प्रखंड में एक कार्यक्रम में 20अगस्त 25 को आगमन हुआ था।इसी क्रम में भोजपुर जिला अंतर्गत खाद निगम के विभिन्न गोदामों – यथा कोईलवर संदेश जगदीशपुर चरपोखरी बडहरा,पीरो , गड़हनी बिहिया के करने वाले मजदूर थे। जिसमें उमेश कुमार ,दिनेश कुमार राम, श्रीनिवास सिंह ,रामनारायण पासवान, मनोरंजन पासवान, फूल मोहम्मद ,प्रदीप राम, विजय यादव, मोती प्रसाद, विनोद यादव सहित सैकड़ो मजदूर उपस्थित रहे और माला से स्वागत किया।
फूड एंड एलाइड वर्कर्स यूनियन के प्रांतीय महामंत्री आर डी सिंह ने इस संबंध में बातचीत करते हुए इन्होंने सबसे पहले कविता के माध्यम से मजदूरों की व्यथा सुनाई
घूमते रहे दर-दर , न्याय की तलाश में
कई दशक बीत गए,फरियाद सुनाते सुनाते ।
तिरंगा फहराकर,आजादी का जश्न मनाते रहे
मजदूरी भी करते रहे ,गुलामी भी सहते रहे ।
कोई सुनने वाला नहीं ,न नेता न न्यालय
बातों से पेट भरते रहे , लोकतंत्र के पहरेदार।
पेट की ज्वाला ,बच्चों की परवरिश
मजदूरी कराते रहा , मजबूर बनाते रहा।
अच्छे दिन आएंगे ,सपने साकार होंगे
सबका बढ़ेगा सम्मान, समान अधिकार होगा।
अन्न का दाना, घर घर तक पहुंचाना
वेतन बकाया के लिए,रोज हाथ फैलाना ।
कोरोना काल में,यात्रियों को सेवा दिया
गोदामों में खटते रहे,न मरे न मरने दिया
वेतन मिलने का ग़म, न सम्मान की अभिलाषा
यूनियन ने बढ़ाया सम्मान, जगाया स्वाभिमान
यह कैसी आजादी है ? कैसा लोकतंत्र है ?
भाई ही भाई को ,मारने के लिए स्वतंत्र हैं।
न्यायादेश का सम्मान हो,मजदूरी का भुगतान हो
मेहनतकश मजदूरों का, समस्या समाधान हो।
आर डी सिंह ने बताया की कम पढ़े-लिखे लोग अपना श्रम देकर मेहनताना के नाम पर वेतन व मजदूरी प्राप्त करते हैं और देश के प्रगति में अपना सहयोग करते हैं। खाद्य निगम के गोदाम से अनाज से भरे बैग को माथे पर पीठ पर कंधे पर चढ़ाकर उतारते हैं और फिर इसे लादने का कठिन कार्य करते हैं।इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दर का भुगतान करना है। कई बार न्यायालय के हस्तक्षेप से निर्धारित भुगतान करने का आदेश भी निर्गत है। लेकिन इन गोदाम के ठेकेदारों द्वारा आर्थिक, सामाजिक, कमजोर और गंवार समझकर शोषण किया जाता है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में ऐसा कोई विभाग नहीं होगा जहां निर्धारित न्यूनतम मजदूरी नहीं मिलता हो,वो भी काम कराने के बाद भी। निर्धारित मजदूरी में प्रति बोरा उतारना चढ़ाना,वजन, सिलाई, 41 से 65 केजी के लिए लगभग 38 रुपया है। जिसमें मात्र 8 रु का भुगतान किया जाता है। आजादी का 79वां स्वतंत्रता दिवस का भी जश्न पूरे देश ने मनाया लेकिन निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का न मिलाना स्वतंत्र भारत के लिए कलंक है।

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