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बक्सर है दुनिया का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल : श्री जीयर स्वामी जी महाराज

RKTV NEWS/पीरो ( भोजपुर)26 अगस्त।परमानपुर चातुर्मास्य व्रत स्थल पर भारत के महान मनीषी संत श्री लक्ष्मी प्रपन्‍न जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि बक्सर दुनिया का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल है। जहां सतयुग में कश्यप ऋषि का जन्म हुआ था। वही कश्यप ऋषि जिनके पुत्र सूर्य भी हुए। सूर्य के वंश परंपरा में भगवान श्री राम का जन्म हुआ। बक्सर की धरती केवल भगवान श्री राम की जन्मस्थली ही नहीं बल्कि ज्ञानस्थली भी है। बक्सर एक ऐसा तीर्थ स्थल है, जहां पर बड़े-बड़े सिद्ध महापुरूष सिद्धि प्राप्त किए हैं। विश्वामित्र मुनि जो गायत्री मंत्र के जन्मदाता हैं, उनको भी बक्सर की धरती पर ही महामुनि की उपाधि भी मिला।
बक्सर एक ऐसा तीर्थ स्थल है, जहां पर विश्वामित्र जैसे महामुनि भी हुए। जिनके द्वारा इस संसार में कई चीजों का अविष्कार किया गया। आज धरती पर जो मकई,बाजरा जैसे और भी कई प्रकार के चीज उत्पन्न होते हैं, उसके अविष्कारक विश्वामित्र मुनि हैं।
बक्सर जो सतयुग से ही महातीर्थ स्थल रहा है। जब सृष्टि का संचालन शुरू हुआ उस समय भगवान श्रीमन नारायण के नाभि से कमल, कमल से ब्रह्मा जी हुए, ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि ऋषि हुए। उन मरीचि ऋषि के पुत्र कश्यप ऋषि हुए। जिनके वंश परंपरा में भगवान सूर्य हुए। वही सूर्यवंशी भगवान श्री राम भी त्रेता युग में प्रकट हुए। इसीलिए बक्सर भगवान श्री राम का जन्मस्थली है। क्योंकि पूर्वजों का जो जन्म स्थान होता है, वही आगे की वंश परंपरा में भी पुत्र और पुत्री का जन्म स्थान माना जाता है। इसलिए राम के पूर्वज सूर्य और कश्यप ऋषि का जन्म स्थान बक्सर है। इसीलिए भगवान श्री राम का भी मूल जन्म स्थान बक्सर है। श्री राम का जन्म अयोध्या में हुआ था, लेकिन उनके पूर्वज वंशज सभी मूल रूप से बक्सर के हैं।
भगवान श्रीमन नारायण के 24 अवतार हुए हैं, उनमें भगवान श्रीमन नारायण का दूसरा अवतार वामन के रूप में हुआ। भगवान वामन का जन्म स्थल भी बक्सर है। यही वह बक्सर की धरती है, जहां पर वामन भगवान बालक के रूप में प्रकट हुए थे। जिन्होंने तीन पग में पूरे संसार, धरती, आकाश सहित माप लिया था। वही वामन भगवान है, जो राजा बलि के सबसे बड़े दानी होने का अहंकार को ही खत्म किए थे, तो बक्सर केवल श्री राम की ही नहीं बल्कि श्रीमन नारायण के 24 अवतारों में दूसरे अवतार भगवान बामन की भी जन्मस्थली है।
इस प्रकार से बक्सर भगवान श्री राम, भगवान वामन का जन्म स्थल भी है। ऐसे बक्सर का विकास अभी तक नहीं हो पाया है। सरकार का नजर आज तक बक्सर पर नहीं गया है। जिसके कारण आज बक्सर में हर सप्ताह महीने में लाखों लाख की संख्या में भक्त गंगा स्नान करने के लिए, वामन भगवान का दर्शन करने के लिए आते हैं। भगवान श्री राम बक्सर में आकर के ज्ञान प्राप्त किए थे। ऐसे बक्सर का विकास आज भी अधूरा है। नेता, मंत्री, सांसद, विधायक को बक्सर के विकास के लिए प्रयास करने की जरूरत है। जिससे बिहार ही नहीं बल्कि भारत के एक सबसे बड़े तीर्थ स्थल का नए सिरे से जीर्णोद्धार किया जा सके।
बक्सर यही वह क्षेत्र है, जहां पर भगवान श्री राम बक्सर के अलग-अलग पांच क्षेत्रों पर 5 दिन तक वास किए थे। उन पांच क्षेत्रों को तीर्थ के नाम से जाना जाता है। जहां पर हर साल लिट्टी चोखा का बड़ा आयोजन होता है। जिसमें श्रद्धालु भक्त उन पांच जगहों पर अलग-अलग प्रसाद बनाकर के ग्रहण करते हैं। बक्सर का पंचकोसी मेला दुनिया का सबसे बड़ा उत्सव होता है। जहां पर लाखों की संख्या में लोग एक ही दिन चरित्रवन बक्सर में लिट्टी चोखा का आयोजन करते हैं। भगवान श्री राम भी जब बक्सर आए थे, तब अहिरौली, नादांव, भभुवर, चरित्रवन इत्यादि जगहों पर प्रसाद ग्रहण किए थे। वहीं श्री राम पांच जगह पर अलग-अलग प्रसाद एवं रात्रि विश्राम किए थे। वहीं बक्सर तीर्थ का राजा है। जहां यमुना जी का भी जन्मस्थली है।
बक्सर गंगा की भी जन्मस्‍थली है, क्योंकि भगवान वामन का जन्म बक्सर में हुआ था। गंगा जी भगवान वामन के चरण कमल से निकली है। इसीलिए गंगा का भी जन्मस्‍थली बक्सर है। जब वामन भगवान अवतार लिए वहीं उनके चरणों को धो करके कमंडल में लेकर के जाया गया। वहीं कमंडल का जल भगवान शिव के जटाओं से होते हुए, गोमुख से पृथ्वी पर प्रकट हुई, जहां से गंगा का उद्गम स्थल बताया जाता है। वहीं गोमुख से गंगा गंगोत्री होते हुए हरिद्वार पहुंचती है। हरिद्वार से आगे वही गंगा भागीरथी गंगा के नाम से जानी जाती है। वह गंगा का भी जन्मस्थली बक्सर है।
यमुना के पिता का नाम सूर्य देव है। वही सूर्य देव जो कश्यप ऋषि के वंश परंपरा में हुए हैं। उन कश्यप ऋषि और सूर्य देव का भी जन्म स्थली बक्सर है। इसीलिए सूर्य देव की पुत्री यमुना जी हैं, तो उनका भी जन्मस्थली बक्सर है।
ऐसे बक्सर में भगवान वामन, भगवान श्री राम, विश्वामित्र मुनि, गंगा, यमुना जी का भी मंदिर का निर्माण होना चाहिए। ऐसे बक्सर में भी भव्य मंदिर के साथ गंगा स्थल तक कॉरिडोर बनाना चाहिए। जिससे भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व से लोग भगवान वामन का दर्शन लाभ प्राप्त कर सके। बक्सर में भगवान वामन, श्री राम, विश्वामित्र मुनि, गंगा जी, यमुना जी का भव्य मंदिर बनना चाहिए। जिससे बक्सर के इतिहास को एक नया आयाम दिया जा सके।

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