
RKTV NEWS/देवघर (झारखंड)23 अगस्त।उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा द्वारा जानकारी दी गई कि खरीफ मौसम में किसानों को उर्वरक की मांग बढ़ जाती है। ऐसे जिले में उर्वरक की कमी ना हो एवं किसानों को निर्धारित मूल्य पर उर्वरक की प्राप्ति हो इसके लेकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी किया गया है।
1. सभी उर्वरक प्रतिष्ठान अपने दुकान का नाम प्रतिष्ठान के आगे दिवाल पर आवश्य अंकित करेंगें, ताकि किसानों को पता चले की उर्वरक की दुकान यहाँ अवस्थित है।
2. दुकान में मूल्य तालिका एवं भंडार स्थिति का बोर्ड अवश्य लगा होना चाहिए जिसमें प्रतिदिन उर्वरक का प्रकार, उनका मूल्य तथा भंडार की स्थित्ति अंकित करेंगें ताकि किसानों को पता चल सके।
3. सभी उर्वरक प्रतिष्ठान निर्धारित मूल्य पर ही उर्वरक की बिक्री करेंगे। औचक निरीक्षण के क्रम में यदि किसी किसान द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक मूल्य पर बेचने की शिकायत की गई तो उक्त प्रतिष्ठान के विरूद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1905 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की सुसंगत धाराओं के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जायेगी।
4. जिले में उर्वरकों के साथ अन्य उत्पाद यथा नैनो उर्वरक, ऑर्गेनिक उर्वरक, Bio-stimulants एवं अन्य Non-subsidized उर्वरक की टैगिंग नहीं की जायेगी एवं न हीं उर्वरक बिक्रेता इसके लिये कृषकों पर दबाव बनायेंगे।
5. सभी उर्वरक प्रतिष्ठान भंडार पंजी का संधारण करेंगें एवं उर्वरक वार तिथि वार, उर्वरक की प्राप्ति बिक्री एवं अवशेष का प्रविष्टी करेंगे।
6. सभी उर्वरक प्रतिष्ठान ई-पॉस मशीन से ही उर्वरक का बिक्री करेंगें। निरीक्षण के क्रम यदि ई-पॉस मशीन बंद पाई जाती है, तो उनके विरूद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जायेगी।
7. उर्वरक बिक्री की पावती रसीद किसानों को देना सुनिश्चित करेंगे।
8. उर्वरक कि बिक्री कम्पनी द्वारा दिए गये प्रपत्र (0) के अनुसार प्राप्त कये गये उर्वरक की कम्पनी का ही उर्वरक बिक्री करना सुनिश्चित करेंगे।
आयुक्त ने इसके अलावा उपरोक्त के आलोक में तथा FCO 1985 के अन्तर्गत ही उर्वरक का नियमानुसार बिक्री के भी निर्देश दिए।यदि औचक निरीक्षण के क्रम में FCO 1985 या वास्तु अधिनियम 1955 उलंघन का मामला पाया जाता है तो नियमानुसार अनुज्ञपि। निलंबित/रद्द करते हुए विधि सम्मवत कार्रवाई की जाएगी।
