
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)23 अक्टूबर।कृषि विज्ञान केंद्र,भोजपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम नरेश ने बताया कि इस रबी सीजन का आगमन हो चुका है और किसान अपनी फसलों की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं । कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम नरेश ने किसानों को सलाह दी है कि वे बीजों की बुवाई से पहले उनका उचित उपचार/शोधन अवश्य करें । बीज शोधन से फसलों में बीमारियों और कीटों का खतरा कम होता है और उत्पादन में वृद्धि होती है । इन्होंने बताया की रबी मौसम की प्रमुख फसलें जैसे गेहूं, चना, मटर, सरसों और मसूर की बुवाई से पहले बीजों का उपचार करने से पैदावार बेहतर होती है। इसके उपचार के लिए कुछ आवश्यक दबाओ के नाम बताए जिसका प्रयोग करके बीज शोधन कर सकते हैं। जैसे की थिरम 75% WP, यह बीज जनित कवक रोगों जैसे ब्लास्ट, गलन, धब्बेदार रोगों से बचाव के लिए । 2 ग्राम थिरम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से मिलाएं ।, कार्बेन्डाजिम 50% Wp – यह बीजों को जड़ों में लगने वाले रोगों और मृदा जनित रोगों से बचाने में मदद करता है। 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलोग्राम बीज के लिए उपयोग करें । एजोक्सीस्ट्रोबिन – यह बीजों को विभिन्न प्रकार के कवक रोगों से बचाता है खासकर जड़ों और तने से जुड़े रोगों से। 2 ग्राम एजोक्सीस्ट्रोबिन प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से मिलाएं और इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid) – कीटों से बचाने के लिए इसका उपयोग करना जरूरी है । यह दीमक, तना मक्खी, और अन्य मिट्टी जनित कीटों से बचाव करता है । 5 मिली इमिडाक्लोप्रिड प्रति किलोग्राम बीज में मिलाएं।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. राम नरेश ने किसानों को बीज उपचार की विधियों की भी बिस्तर से जानकरी देते हुए कहा है कि सबसे पहले बीजों को एक साफ और सूखी जगह पर फैला लें । फ़िर दिए गए अनुपात में बीज उपचार की दवा मिलाएं और उसे बीजों पर छिड़कें, हाथों या किसी साफ कपड़े की मदद से बीजों को अच्छी तरह मिलाएं ताकि दवा सभी बीजों पर समान रूप से लग जाए । बीज उपचार के बाद, उन्हें छांव में सूखने दें और तुरंत बुवाई करें ।
डॉ. राम नरेश ने किसानों से यह भी अपील की कि वे बीज उपचार के बिना फसल न लगाएं, क्योंकि इससे फसल रोगों के प्रति कमजोर हो जाती है, जिससे उत्पादन में कमी आ सकती है । रबी सीजन की तैयारी के लिए बीज उपचार एक महत्वपूर्ण कदम है जो किसानों को बेहतर उत्पादन और स्वस्थ फसलें प्रदान करने में सहायक है ।
