वोटर अधिकार यात्रा में अपने वोट को बचाने और बिहार में बदलाव दोनों का संदेश है।
RKTV NEWS/पटना(बिहार )20 अगस्त।भाकपा-माले महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने आज पटना में कहा कि 130वां संविधान संशोधन विधेयक भारत की संविधानिक संघीय व्यवस्था और संसदीय लोकतंत्र के लिए मौत की घंटी है.
उन्होंने कहा कि इस विधेयक के अनुसार, यदि किसी मंत्री को किसी भी आरोप में 5 साल की सजा होती है और वह 30 दिन जेल में रहता है, तो उसे पद से हटना पड़ेगा. जाहिर है, प्रधानमंत्री या भाजपा के मंत्री जेल नहीं भेजे जाएंगे. यह प्रावधान गैर-भाजपा सरकारों को अस्थिर करने और उन्हें चलने न देने की एक सोची-समझी साजिश है.
ईडी, सीबीआई और एनआईए के दुरुपयोग और राज्यपाल कार्यालयों को भाजपा के दफ्तरों में तब्दील करने के बाद, अब यदि यह कानून बनता है तो गैर-भाजपा सरकारों का अस्तित्व लगभग असंभव हो जाएगा. इसलिए, लोकतंत्र, संविधान और कानून के राज में विश्वास रखने वाले हरेक नागरिक को इस दुस्साहसी विधेयक का जोरदार विरोध करना चाहिए.
दीपंकर भट्टाचार्य ने इंडिया गठबंधन द्वारा जस्टिस वी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुने जाने का स्वागत करते हुए कहा कि यह एक सकारात्मक और समयोचित निर्णय है. जस्टिस रेड्डी का ट्रैक रिकॉर्ड संविधान और मानवाधिकारों की रक्षा में उल्लेखनीय रहा है. उन्होंने छत्तीसगढ़ में काॅरपोरेट लूट को बढ़ावा देने वाले सलवा जुडूम अभियान को गैर-संवैधानिक ठहराया था. ऐसे ही व्यक्ति की इस पद पर जरूरत है. कोई आरएसएस विचारधारा से जुड़ा व्यक्ति इस देश को नहीं चाहिए.
इंडिया गठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की दिशा में एक जन-आंदोलन बन रही है. यह 13 दिनों की यात्रा है. 17 से 19 अगस्त तक सासाराम से बरबीघा तक यात्रा हुई. जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है. वोटर अधिकार यात्रा का संदेश है कि एक-एक वोट के अधिकार की रक्षा करनी है और उसका सही इस्तेमाल करना है. बीस बरसों से बोझ बनी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकना है. इसमें बचाव व बदलाव दोनों का संदेश है. समर्थन के लिए तहे दिल से सबों का शुक्रिया.
उसी इलाके में पिछले अक्टूबर में भी हमने पदयात्रा की थी. उस वक्त लोगों में बदलाव की आकांक्षा उभर कर सामने आई थी. दलित उत्पीड़न की घटनाओं के खिलाफ गया, नवादा में बड़ा आक्रोश है. इस बार बदलाव की आकांक्षा के साथ-साथ एसआईआर को लेकर आक्रोश भी जुड़ गया है.
एसआईआर पर अब कोई कन्फयूजन नहीं है. 65 लाख लोगों के नाम की सूची आ गई है उससे साफ जाहिर हो गया है कि यह नाम काटने का अभियान है. बात तो बांग्लादेशी घुसपैठिए की होती है लेकिन नाम प्रवासी मजदूरों का काटा जा रहा है. गुजरात का कोई नेता बिहार का मतदाता बन जाता है, लेकिन जो बिहारी गुजरात कमाने जाते हैं, उनका नाम काट दिया जा रहा है. एनआरआइए के लिए भी फाॅर्म 6 ए है. लेकिन बिहार के प्रवासी मजदूरों के लिए नहीं है.
इसमें दो तरह के घोटाले भी चल रहे हैं. एक तो लाखों लोगों के घर का पता शून्य बता दिया गया. इन्हें चुनाव आयोग बेघर मतदाता बतला रहा है. फिर इनका वेरीफिकेशन कैसे हुआ? उनसे बातचीत कैसे हुई? यह सबकुछ सवालों के घेरे में है.
दूसरा घोटाला यह है कि हमारी पार्टी व बीएलए की ओर से जो आपत्ति दी जा रही है, उस पर आयोग कह रहा है कि कोई भी आपत्ति दर्ज नहीं हुई है. मिंटू पासवान को खुद हम बिहार के चुनाव अधिकारी के कार्यालय में लेकर पहुंचे थे. बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि भोजपुर में यह आपत्ति दर्ज हो जाएगी, लेकिन अभी भी शून्य ही आ रहा है. समाजवादी पार्टी ने दिखा दिया कि 18000 हलफनामा दिया गया, लेकिन उन शिकायतों को सुनने के लिए चुनाव आयोग तैयार नहीं है. इससे साफ जाहिर है कि चुनाव आयोग का मकसद वोट का अधिकार छीन लेने का है. दिल्ली में अपने संवाददाता सम्मेलन के दौरान चुनाव आयोग ने एक भी सवाल का सही जवाब नहीं दिया. बल्कि वह मजाक ही उड़ाता रहा. यह मतदाता सूची अभी ड्राफ्ट है. अंतिम रूप से क्या होगा पता नहीं है, इसलिए सभी को सजग रहना है.
संवाददाता सम्मेलन में माले महासचिव के अलावा राज्य सचिव कुणाल, यात्रा में शामिल एमएलसी शशि यादव, पूर्व विधायक मनोज मंजिल, लोकयुद्ध के संपादक संतोष सहर और विधायक दल के नेता सत्यदेव राम ने भी संबोधित किया.

