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भोपाल:तुलसी साहित्य अकादमी भोपाल की सृजन श्रृंखला 48- के अंतर्गत – डा. शिव कुमार दीवान की “ कविता कामिनी, डा. अशोक तिवारी अमन की ‘ अमन दोहावली और सुधा दुबे की ‘अस्तित्व’ लोकार्पित।

भोपाल/ मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद)18 अगस्त।दुष्यंत स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय में डॉ. मोहन तिवारी आनंद की अध्यक्षता, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सेवा निवृत्त) के मुख्य आतिथ्य और प्रसिद्ध साहित्यकार चिंतक सुरेश पटवा के सारस्वत आतिथ्य तथा वरिष्ठ व्यंग्यकार और समीक्षक गोकुल सोनी के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ। मां सरस्वती के पूजन अर्चन तथा दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत आशा श्रीवास्तव के सरस्वती वंदना पाठ उपरांत मंचस्थ अतिथियों का स्वागत किया गया।
डॉ.मोहन तिवारी आनंद ने तीनों रचनाकारों की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए “लोकार्पित कृतियों के सृजन धर्मियों की कलम के कौशल को उत्कृष्ट निरूपित किया। डा.शिव कुमार दीवान की कृति “कविता कामिनी” की कविताओं को वर्तमान परिस्थितियों की समावेशी रचनाएं संकलित हैं।सुधा दुबे की कृति “अस्तित्व” को सृजन का उत्कृष्ट उदाहरण मानते हुए श्रीमती दुबे की कलम की परिपक्वता की सराहना की।
मुख्य अतिथि की आसंदी से बोलते हुये अनुराधा शंकर ने तीनों पुस्तकों को अपने-अपने क्षेत्र की उत्कृष्ट कृतियां बताया। उन्होंने कहा कि साहित्य की दुनिया में रचनाकारों को पहले पढ़ना चाहिए फिर लिखना चाहिए। वह लेखन करिश्माई होगा।
सारस्वत अतिथि सुरेश पटवा ने “ लोकार्पित तीनों कृतियों पर अपने विचार रखते हुए तीनों कलमकारों की सृजनधर्मिता को समयानुकूल निरूपित करते हुए उत्तम प्रयास बताया।
लोकार्पित पुस्तकों के लेखक डा. शिव कुमार दीवान, डा. अशोक तिवारी अमन और सुधा दुबे ने अपने रचना अनुभव साझा करते हुए चुनिंदा रचनाओं का पाठ किया, जिन्हें उपस्थित साहित्य रसिकों द्वारा सराहा गया। सभी रचनाकारों में कुछ चुनिंदा रचनाओं का पाठ किया।
समीक्षक डॉक्टर संगीता भारद्वाज ने डा.अशोक तिवारी की “अमन दोहावली” में 1100 दोहों को परिपक्व एवं विषयानुकूल एवं समयानुसार उपयुक्त सृजन बताया। अमन दोहावली को उत्कृष्ट संकलन निरूपित किया। समीक्षक वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने “कविता कामिनी” को स्वाभाविक कविताओं का गुच्छ कहा। कुछ कविताओं का उल्लेख कर उनकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला।
समीक्षक गोकुल सोनी ने सुधा दुबे की लघुकथाओं को जीवन के वास्तविक अनुभव से उपजी रचनाएं निरूपित किया। विशिष्ट अतिथि गोकुल सोनी ने यद्यपि कृति अस्तित्व की विस्तृत समीक्षा की साथ ही विशिष्ट अतिथि के दायित्वों का निर्वाह करते हुए लोकार्पित तीनों कृतियों पर समीक्षात्मक वक्तव्य दिया।
स्वागत वक्तव्य दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय की निदेशक करुणा राजुरकर एवं आभार प्रदर्शन रमेश भूमरकर ने किया। कार्यक्रम का सरस संचालन वरिष्ठ व्यंग्यकार विवेक रंजन ने किया।

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