कहा MFIs के उत्पीड़न को रोकने के लिए लाई जाए सख्त नीति, महिलाओं के 2 लाख रु. तक के कर्ज़ हो अविलंब माफ।
RKTV NEWS/आरा(भोजपुर )18 अगस्त।आज सांसद सुदामा प्रसाद ने लोकसभा के मानसून सत्र में माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की प्रताड़ना की शिकार और जीविका समूहों की नाकामी के कारण कर्ज के जाल में फंसती महिलाओं का सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि बिहार में माइक्रो फाइनेंस संस्थाएं (MFIs) महिलाओं के लिए गंभीर संकट बन चुकी हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा बनाए गए नियामक ढांचे के बावजूद ये संस्थाएं मनमाने ढंग से काम कर रही हैं। ये गरीबों को ऊँची ब्याज दर पर ऋण देती हैं और फिर वसूली के नाम पर लगातार प्रताड़ित करती हैं।
उन्होंने कहा कि कई महिलाएं MFI एजेंटों के अत्यधिक दबाव में आत्महत्या तक कर चुकी हैं। RBI की निगरानी और नियंत्रण की विफलता ने इन संस्थाओं को बेलगाम बना दिया है। अब तक दोषी संस्थानों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। राज्य और केंद्र की भाजपा-जदयू सरकार भी महिलाओं के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह असफल रही है, जिससे महिलाओं में भय, असुरक्षा और गहरी निराशा फैल रही है। 2014 से RBI MFIs पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं ला सका।
उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग किया जिसमें।
1. MFIs के उत्पीड़न को रोकने के लिए सख्त नीति लाई जाए।
2. गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग के लिए वित्तीय सहायता योजनाओं को सशक्त किया जाए।
3. महिलाओं के 2 लाख रु. तक के कर्ज़ को अविलंब माफ किया जाए।
4. आपराधिक MFIs को तत्काल प्रतिबंधित कर दोषियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
5. हर पंचायत में सरकारी बैंक खोले जाएं और महिलाओं को 2% सालाना ब्याज पर ऋण मिले।
6. जीविका समूह की महिलाओं को रोजगार दिया जाए और उनके उत्पाद की सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए।
7. सहारा व अन्य वित्तीय संस्थाओं में जमा महिलाओं की राशि तुरंत वापस की जाए।
उक्त जानकारी सांसद के निजी सहायक चन्दन कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

