
पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 10 अगस्त। हिन्दू धर्म मे सावन मास की पूर्णिमा को रक्षा सूत बांधने का विधान है। इस दिन रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाता है। प्रचलित भाषा में इसे राखी का त्यौहार भी कहा जाता है। रक्षाबंधन के दिन बहनों ने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधा। पूरे दिन यह सिलसिला चलता रहा। बहनों ने अपने भाइयों को चंदन, रोली, दही, कुमकुम का टीका लगा कर उनकी आरती उतारी और उनके कलाई पर राखी बांधा। राखी बांधने के बाद मिठाई खिलाकर भाइयों का मुॅह मीठा कराया और उनके दीर्घायु होने की कामना की। भाइयों ने भी बहनों को अपने सामर्थ्य के अनुसार उपहार दिया और उनकी रक्षा करने का संकल्प लिया। दूर रहने वाली बहनों ने अपने भाइयों को ऑनलाइन या ऑफलाइन राखी भेजा।

भाइयों ने भी बहनों के यहाँ जाकर राखी बंधवाया। कई घरों में सावन मास की पूर्णिमा को रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। वहीं कई घरों में सत्यनारायण भगवान की पूजा भी की गई। राखी को लेकर सुबह से ही मिठाई की दुकानों पर भीड़ लगी रही। कोई अपने भाई के लिए तो कोई अपनी बहन के लिए मिठाई खरीद रहा था।
