
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)29 जुलाई। सोमवार को महाराजा कॉलेज, आरा के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा “वैश्विक वित्तीय क्षेत्र में करियर की संभावनाएं और चुनौतियाँ” विषय पर एक आमंत्रित व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। इस व्याख्यान का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैश्विक वित्तीय क्षेत्र में विकसित होते रुझानों, नई करियर संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित कौशलों से अवगत कराना था।
इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता थे नीरज कुमार, हेड – यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा, म्यूमा कॉलेज ऑफ बिजनेस, और वरिष्ठ अधिकारी – फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स, फ्लोरिडा, संयुक्त राज्य अमेरिका। वे अपनी पत्नी शिल्पी सिन्हा, उपाध्यक्ष, सिटीबैंक, टैम्पा, फ्लोरिडा तथा एच. डी. जैन कॉलेज, आरा के भौतिकी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार सिन्हा के साथ उपस्थित हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि के आगमन से हुई, जिन्हें प्राचार्या प्रो. कनक लता कुमारी द्वारा पारंपरिक रूप से पुष्पगुच्छ प्रदान कर स्वागत किया गया। इसके पश्चात अतिथियों ने बाबू वीर कुंवर सिंह एवं महाराजा बहादुर राम रण विजय प्रसाद सिंह की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्य सत्र का आरंभ शॉल, मोमेंटो और पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्य अतिथि का औपचारिक स्वागत करते हुए हुआ। कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ. सुचि सिन्हा द्वारा प्रस्तुत की गई। तत्पश्चात आईक्यूएसी के समन्वयक प्रो. चंचल कुमार पांडे ने स्वागत भाषण दिया और वक्ता का परिचय कराया।
नीरज कुमार ने अपने व्याख्यान में वैश्विक करियर परिदृश्य, वित्तीय क्षेत्र की प्रवृत्तियाँ, अंतरराष्ट्रीय स्तर के कौशल, साइबर अपराध, ऑनलाइन फ्रॉड, तथा आज की अर्थव्यवस्था में अनुकूलनशीलता की महत्ता जैसे विषयों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि आलोचनात्मक विश्लेषण क्षमता, तकनीकी दक्षता, और बहुसांस्कृतिक संवाद कौशल रखने वाले पेशेवरों की वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग है। उन्होंने इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, रिस्क मैनेजमेंट, फिनटेक, डेटा-आधारित पोर्टफोलियो विश्लेषण, वैश्विक परामर्श एवं कॉर्पोरेट फाइनेंस जैसे उभरते क्षेत्रों में करियर विकल्पों पर भी चर्चा की। व्याख्यान में डिजिटल परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और इंटर्नशिप, नेटवर्किंग, तथा अंतरराष्ट्रीय अनुभव की उपयोगिता को भी रेखांकित किया गया।
श्री कुमार ने अपने व्यक्तिगत करियर अनुभव को साझा करते हुए छात्रों को निरंतर सीखते रहने और वैश्विक अवसरों के लिए स्वयं को तैयार करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय छात्र यदि कुशल, जिज्ञासु और समर्पित हों, तो वैश्विक मंच उनके लिए सुलभ है।
व्याख्यान के पश्चात प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें छात्रों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे और श्री कुमार ने संतोषजनक उत्तर दिए। अंत में प्राचार्या प्रो. कनक लता कुमारी ने अध्यक्षीय संबोधन में इस व्याख्यान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों के वैश्विक दृष्टिकोण को विकसित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।
कार्यक्रम में कॉलेज के समस्त शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमित प्रकाश द्वारा किया गया।
यह व्याख्यान न केवल महाराजा कॉलेज की शैक्षणिक सक्रियता का परिचायक था, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा और अवसरों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुआ।
