
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)27 जुलाई।सावनमास में आयोजित शिवपुरी मे शिवपुराण की कथा में ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने कहा कि सम्पूर्ण जगत शिवमय है,जीव भगवान शिव का अंश है,परन्तु अविद्या से मोहित होकर अवश होरहा है और अपने को को शिव से भिन्न समझ बैठा है।अविद्या से मुक्त होने पर वह शिव ही हो जाता है। जैसे अग्नि तत्व काष्ठ में स्थित है,परंतु जो उस काष्ठ का मंथन करता है,वह अग्नि को देख पाता।उसी तरह जो मानव यहां भक्ति आदि साधनों का अनुष्ठान करता है,उसे शिव का दर्शन हो जाता है।आगे आचार्य जी ने कहा कि अहंकार से युक्त होने के कारण शिव का अंश जीव कहलाता है,अहंकार से मुक्त होने पर वह साक्षातशिव ही है।। आत्मचिंतन तथा तत्वों के विवेक से ऐसा कोशिश किया जाय कि शरीर से अपनी पृथकता का बोध होजाय। मुक्ति की इच्छा रखने वाले मानव, शरीर व उसके अभिमान को त्यागकर अहंकार शून्य व मुक्त हो सदाशिव में लीन होजाता है। अध्यात्म चितन एवंम् भगवान शिव की भक्ति –ज्ञान के मूल कारण हैं।सत्संगति व गुरूकृपा से यह सहज ही अनुभव मे आ जाता ।
