
व्यंग्य शुगर कोटेड कड़वा कैप्सूल है: गोकुल सोनी
भोपाल /मध्यप्रदेश (मनोज कुमार प्रसाद )18 जुलाई ।मध्यप्रदेश के राजधानी भोपाल में कल गद्य प्रवाह समूह की आभासी गोष्ठी गोकुल सोनी की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
गद्य प्रवाह समूह के तत्वावधान में कमल चंद्रा के द्वारा गद्य प्रवाह की संक्षिप्त जानकारी के साथ सधे हुए संचालन में व्यंग्य विधा पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। सबसे पहले प्रमदा ठाकुर ने सरस्वती वंदना करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
गद्य प्रवाह समूह की अध्यक्ष मधूलिका श्रीवास्तव ने स्वागत वक्तव्य दिया।
व्यंग्यकार राजीव खरे की व्यंग्य रचना “सफेद कबूतर” और ऊषा चतुर्वेदी की व्यंग्य रचना “छन्नो बुआ” का पाठ शेफालिका श्रीवास्तव ने किया। समीक्षक द्वै सुधा दुबे एवं जनक कुमारी सिंह बघेल ने रचनाओं की कुशल समीक्षा की। दोनो ही व्यंग्य अपने आप में करारा कटाक्ष करते हुए पाठक और श्रोताओं को खुलकर हंसाने और गुदगुदाने में सफल रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गोकुल सोनी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में व्यंग्य का इतिहास, और सफल व्यंग्य लिखने के टिप्स दिए और कहा कि- “व्यंग्य लक्षणा और व्यंजना में तीखा कटाक्ष करता है। उसकी चोट से घाव नहीं दिखता पर मारक क्षमता इतनी होती है कि घायल किए बिना नहीं छोड़ता।” व्यंग्य विसंगतियों के इलाज के लिए “कड़वा पर शुगर कोटेड कैप्सूल है।”
अंत में सुश्री शेफालिका के आभार के बाद गोष्ठी की, विषय की और समीक्षा की, समीक्षात्मक चर्चा उपस्थित श्रोताओं द्वारा भी की गई। रांचीबस जुड़े संजय कुमार ने कार्यक्रम को सफल और सार्थक बताया वहीं ग्वालियर से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार महेंद्र भट्ट ने ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता को निरूपित किया। अंत में हल्के-फुल्के अंदाज में गोष्ठी पूर्णता के साथ सम्पन्न हुई।
