
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)16 जुलाई।श्रावण समारधना के क्रम में श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् एवं सनातन-सुरसरि सेवा न्यास द्वारा श्रीसहदेव गिरि मंदिर कतिरा में आयोजित सप्तदिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन प्रवचन करते हुए आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि जो सभी के लिए उपकार की भावना रखता है वही भगवान शिव का सही भक्त है और उसे ही समस्त सुफल प्राप्त होते हैं। शतरुद्रसंहिता में भगवान शिव के सौ अवतारों का वर्णन करते हुए नन्दीश्वर ने सनत्कुमार जी से सर्वोपकारनिरत व्यक्ति को ही भगवान शिव का प्रिय भक्त कहा है। शिव सेवा से भील भीलनी का अगले जन्म में नल दमयंती के रूप में राजा रानी होना भगवान शिव की भक्तवत्सलता का सुंदर उदाहरण है। इसी प्रकार दूसरों को कष्ट पहुंचाने वाले रावण को भगवान शिव ने हनुमान के रूप में अवतार लेकर सावधान किया तथा नहीं सुधरने पर दंडित भी किया। भगवान शिव के किरातावतार की कथा तथा द्वादश ज्योतिर्लिंगों की कथा के माध्यम से आचार्य ने भगवान शिव की दयालुता और शरणागत की रक्षा का सुंदर चित्रण किया। उन्होंने कहा कि पार्थिवेश्वर, नर्मदेश्वर अथवा अपने आस-पास में प्रतिष्ठित शिव लिंगों की पूजा करके समस्त कामनाओं की प्राप्ति और मुक्ति सुलभ हो जाती है। प्रातःकाल वैदिक पंचदेव पूजन, शिवार्चन तथा रुद्राभिषेक संपन्न हुआ। इस अवसर पर काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन तथा प्रवचन श्रवण किया। व्यवस्था पुजारी अजय कुमार मिश्र तथा संचालन मधेश्वर नाथ पाण्डेय ने किया।
