
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)12 जुलाई।श्रावण समारधना के अवसर पर श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् एवं सनातन-सुरसरि सेवा न्यास द्वारा श्रीसहदेव गिरि मंदिर कतिरा में आयोजित सप्तदिवसीय श्री शिव महापुराण की कथा के प्रथम दिन प्रवचन करते हुए आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि परात्पर परब्रह्म ही कल्याण स्वरूप और कल्याण करने वाले शिव हैं। वे सृष्टि के उद्भव और विकास के लिए असंख्य अवतार धारण करते हैं। पांच कल्पों में श्री ब्रह्मा जी के चिंतन करने पर पांच रूपों में भगवान शिव प्रकट हुए जिन्हें सद्योजात, तत्पुरुष, वामदेव,अघोर और ईशान नामों से जाना जाता है। भगवान शिव के पांच मुख भी हैं।इन पांचों से चार-चार महापुरुष प्रकट हुए जिनसे सृष्टि प्रकाशित हुई।इन पांचों अवतारों में भगवान शिव ने ब्रह्मा जी को अलग-अलग योगों का उपदेश किया जिससे उन्होंने संसार का विस्तार किया। आचार्य ने कहा कि भगवान शिव के भजन से संसार की समस्त इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति तथा मोक्ष भी सुलभ होता है।
इसके पूर्व प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रातःकाल वैदिक पंचदेव पूजन और रुद्राभिषेक काशी से पधारे पं देवेश अग्निहोत्री के द्वारा सम्पन्न हुआ। मंदिर के पुजारी पं अजय कुमार मिश्र ने बताया कि प्रतिदिन प्रातःकाल विशेष पूजन और रुद्राभिषेक तथा सायंकाल चार बजे से आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज द्वारा शिव पुराण की कथा होगी। इस अवसर पर कतिरा, पकड़ी, स्टेशन, नवादा आदि क्षेत्रों के श्रद्धालु उपस्थित रहे। संचालन संस्थान के संयुक्त सचिव मधेश्वर नाथ पाण्डेय तथा स्वागत डॉ सत्यनारायण उपाध्याय ने किया।
