
RKTV NEWS/पटना(बिहार)26 जून।बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) द्वारा आज ज्ञान भवन, पटना में “ग्रामीण स्वास्थ्य समन्वयकों के एक दिवसीय संवेदीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम” का सफल आयोजन किया गया। इस महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम में भागलपुर, लखीसराय, मुंगेर, शिवहर एवं शेखपुरा जिलों की 523 ग्राम पंचायतों से आए ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य समन्वयकों ने सहभागिता की।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य था- समुदाय स्तर पर आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाना, जन्मजात दिव्यांगता को रोकना, प्राथमिक उपचार एवं तात्कालिक सहायता हेतु स्वास्थ्य समन्वयकों को दक्ष बनाना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आपदाओं से निपटने की तैयारियों को सुदृढ़ करना।
यह कार्यक्रम प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदयकांत की अध्यक्षता में तथा माननीय सदस्य पी. एन. राय, नरेंद्र कुमार सिंह एवं प्रकाश कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर मेजर जनरल विकास श्रीवास्तव तथा प्राधिकरण के अवैतनिक सलाहकार डॉ. एल. बी. सिंह ने सहभागिता की।
कार्यक्रम की शुरुआत BSDMA के सचिव मो. वारिस खान के स्वागत भाषण से हुई। इसके उपरांत उपाध्यक्ष, सदस्यगण, सलाहकारगण एवं विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया गया। डॉ. अजीत कुमार सिंह द्वारा कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम में प्राधिकरण की जनजागरूकता फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसे प्रतिभागियों ने अत्यंत प्रेरणादायक बताया। इसके पश्चात सदस्य पारस नाथ राय, जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल विकास भारद्वाज, सलाहकार डॉ. एल. बी. सिंह, डॉ. अंजली (महावीर कैंसर संस्थान) एवं डॉ. जीवन कुमार (वरीय सलाहकार) द्वारा आपदा प्रबंधन से संबंधित विविध विषयों पर ग्रामीण स्वास्थ्य समन्वयकों से संवाद किया गया।
अनुशासन और समन्वय से आपदा प्रबंधन को नया मुकाम : मेजर जनरल विकास श्रीवास्तव
कार्यक्रम में मेजर जनरल विकास श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय सेना न केवल देश की सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर नागरिक प्रशासन को आपदा राहत कार्यों में भी हरसंभव सहयोग देती है। उन्होंने उल्लेख किया कि “2017 के बाद से बिहार में सेना की प्रत्यक्ष तैनाती की आवश्यकता नहीं पड़ी है, जो बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और अन्य नागरिक संस्थाओं के सशक्त समन्वय एवं अनुशासित कार्यशैली का परिचायक है। उन्होंने आपदा के समय राहत में प्रत्येक व्यक्ति और संस्था को अपनी भूमिका पूरी निष्ठा से निभाने पर बल दिया।
आपदा प्रबंधन में व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता – BSDMA का संदेश
उपाध्यक्ष ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की एकजुटता, समयबद्ध तैयारी और सेवा भावना से ही सफल होता है। उन्होंने कई ज्ञानवर्धक उद्धरण साझा करते हुए कहा,“संकट की घड़ी में सबसे बड़ा संसाधन हमारा संयम, सहयोग और समर्पण होता है। जब हर नागरिक सेवा का संकल्प ले, तब किसी भी आपदा का प्रबंधन समुचित रूप से संभव होता है। डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मी राष्ट्र के असली रक्षक होते हैं।”
पी. एन. राय ने कहा कि बिहार एक आपदा-प्रवण राज्य है, जहाँ बाढ़, भूकंप, लू एवं वज्रपात जैसी आपदाएँ लगातार आती हैं, किंतु अब सरकार सजग एवं संवेदनशील है। वज्रपात को अत्यंत घातक बताते हुए उन्होंने सभी को इससे बचने और व्यापक जनजागरूकता फैलाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि अब तक 15,000 बच्चों को सुरक्षित तैराकी एवं आपदा से बचाव का प्रशिक्षण दिया गया है और इसे और व्यापक बनाने के लिए स्थानीय सहभागिता आवश्यक है।
उन्होंने सभी से एसडीआरएफ/एनडीआरएफ से जुड़ने, हेलमेट पहनने, ट्रैफिक नियमों का पालन करने तथा दामिनी, इंद्रवज्र और सचेत जैसे मोबाइल एप्स का उपयोग करने की अपील की। तापमान वृद्धि और लू की घटनाओं को गंभीर बताते हुए उन्होंने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए व्यवहार परिवर्तन आवश्यक है।
संदेश: “आपदा नहीं हो भारी, यदि पूरी हो तैयारी”
कार्यक्रम के दौरान एसडीआरएफ़ द्वारा मॉक ड्रिल के माध्यम से आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की महत्ता को बतलाया गया। बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ‘सशक्त समुदाय, सुरक्षित बिहार’ के लक्ष्य को लेकर पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। यदि पंचायत स्तर के स्वास्थ्य समन्वयकों को उचित प्रशिक्षण मिले, तो ग्रामीण समुदायों की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता में कई गुना वृद्धि संभव है। यह आयोजन उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास था। कार्यक्रम का मंच संचालन संदीप कमल ने किया तथा औपचारिक समापन ओएसडी मो. मोइज़ उद्दीन के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल रजनीश तिवारी, विशेष सचिव आशुतोष सिंह सहित प्राधिकरण के पदाधिकारीगण एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।
