
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)13 जून।बढ़ते साइबर अपराध में आम लोगों को डरा कर रख दिया है।पता नहीं कब ये अपराधी बैंक को खाली कर देंगे ।सरकार और पुलिस प्रशासन भी इनके सामने नत मस्तक है। ऐसा ही एक मामला पूर्व जिला नजीर आनंद मोहन सिंहा अस्पताल रोड निवासी आरा के साथ हुआ है । वरिष्ठ पत्रकार डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा ने बातचीत कर जानने की कोशिश की, की अपराधी किस प्रकार उनके खाते से दो लाख पैंतीस हजार रुपए निकाल लिये।
इस संबंध में श्री सिन्हा ने बताया कि 20 मई 2025 को गिरीडीह रेलवे स्टेशन से आरा लौटने के क्रम में लगभग 2:00 बजे रात्रि को मेरा मोबाइल गुम हो गया। 21 मई में को शाम आरा पहुंच कर इस नंबर का सिम लिया और रात्रि 10:00 बजे वह चालू हो गया।22 मई को तीन बजे उत्कर्ष बैंक जाकर अपना खाता अपडेट कराया और स्टेटमेंट लिया। उससे पता चला की 21 मई और 22 मई को एक, एक लाख रुपए निकाले गये है। बैंक से स्टेटमेंट का एक प्रति लेकर साइबर थाना जो आरा एस पी आफिस कैंपस में जाकर शिक़ायत दर्ज कराई जिसका कागज़ात मेरे पास है। साइबर थाना से जानकारी लेने पर बताया जा रहा है कि कारवाई की जा रही है लेकिन अभी तक रिकवरी के कुछ असर नहीं दिख रहे हैं।
मोबाईल चोरी की घटना पर तत्काल क्या करे इस संबंध साइबर अपराध विशेषज्ञ डॉक्टर विकास कुमार ने बताया की जैसे ही मोबाइल की चोरी या यूपीआई से पैसा निकालने पर तत्काल हेल्प नंबर 1930 पर सूचित करें। इन्होंने बताया कि सिम को लॉक करें या इस नंबर का सिम पुनः चालू करवा ले,दूसरा उसका IMEI से अपने फोन को लॉक करवा दे जिससे कि कोई भी सिम मोबाइल पर काम नहीं करें।
पैसा कैसे निकलता है इस पर इन्होंने बताया कि साइबर अपराधी को जैसे ही मोबाइल मिलता है यह गूगल पे और फोन पे को चेक करता है की खाता एक्टिव है कि नहीं ।फिर पीन को रिसेट करता है और ओटीपी की जानकारी कर लेता है। क्योंकि मोबाइल उसी के पास है। फिर आराम से अकाउंट से पैसा खाली कर लेता है।
