
पटना/बिहार (राकेश मंगल सिन्हा) 27 मई। पति की लंबी आयु के लिए सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखा। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को सुहागिन महिलाओं ने अपने सुहाग की रक्षा के लिए वट सावित्री व्रत रखा और वट वृक्ष की पूजा अर्चना पारंपरिक तरीके से की। पति के दीर्घायु होने की कामना के लिए वट सावित्री व्रत किया जाता है। इसमें वट वृक्ष की पूजा अर्चना तथा निर्जला उपवास रखने की परंपरा है। वट सावित्री व्रत में वट वृक्ष का विशेष महत्व है। वट वृक्ष को बोलचाल की भाषा में बरगद भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की जड़ में ब्रह्मा, तना में विष्णु तथा शाखाओं मे शिव का वास होता है। यह वृक्ष दीर्घायु तथा विशाल होता है। इसे अक्षय वृक्ष भी कहा जाता है। इसकी लटकती शाखों को माता सावित्री माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री ने अपने प्रतिव्रता के दम पर यमराज से अपने पति को वापस ले लिया था। इसीलिए वट सावित्री की पूजा अखंड सौभाग्य के लिए की जाती है। इस अवसर पर शुद्धता से नहा धोकर सुहागिन महिलाओं ने श्रृंगार करके वट वृक्ष की पूजा अर्चना की। महिलाओं ने कच्चे धागे के साथ वट वृक्ष की परिक्रमा कर वट वृक्ष की तना पर धागा लपेटा और अखंड सौभाग्य का वरदान मांगा। साथ ही सुहागन महिलाओं ने संतान प्राप्ति, परिवार के सुख, समृद्धि एवं सौभाग्य में वृद्धि के लिए भी वरदान मांगा। महिलाओं ने बरगद के पेड़ के नीचे पूजा अर्चना की। अनेक महिलाओं ने घर मे बरगद के पेड़ का डाल लगाकर उसकी पूजा अर्चना की।
