
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)14 मई।बढ़ते कुपोषण और पोषण की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बायोफोर्टिफाइड चावल आज की कृषि और स्वास्थ्य प्रणाली में एक क्रांतिकारी पहल बनकर उभरा है । यह विशेष किस्म का चावल उन्नत तकनीक द्वारा विकसित किया गया है, जिसमें सामान्य चावल की तुलना में प्राकृतिक रूप से अधिक मात्रा में आयरन, जिंक और आवश्यक विटामिन पाए जाते हैं । कृषि विज्ञान केंद्र का उद्देश्य है समाज को पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराना और किसान भाइयों को लाभकारी खेती के विकल्प प्रदान करना । इस चावल के नियमित सेवन से खून की कमी (एनीमिया), थकान और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी जैसी समस्याओं से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है । यह विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और वृद्धजनों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है । किसान भाइयों के लिए भी यह चावल एक उत्तम विकल्प है । इसकी खेती सामान्य चावल की भांति ही की जाती है । बायोफोर्टिफाइड चावल की किस्में कीटों और रोगों के प्रति सहनशील होती हैं, जिससे रसायनों का प्रयोग कम करना पड़ता है । DRR धान 45, धान 324 एवं CR धान 310 आदि बायोफोर्टिफाइड धान की उन्नत किस्में हैं, जिनमें जिंक की अधिक मात्रा पाई जाती है। एक एकड़ भूमि से औसतन 18 से 22 क्विंटल तक उपज प्राप्त की जा सकती है, जो कि अच्छी गुणवत्ता के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी लाभदायक है । इस चावल की बाजार में मांग निरंतर बढ़ रही है, क्योंकि उपभोक्ता अब स्वास्थ्यवर्धक और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्यान्न को प्राथमिकता दे रहे हैं । कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को इसकी खेती के लिए प्रशिक्षण तथा तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है, जिससे बायोफोर्टिफाइड चावल की खेती को और अधिक प्रोत्साहन मिल रहा है।बायोफोर्टिफाइड चावल – स्वस्थ समाज और सक्षम किसान की दिशा में एक निर्णायक कदम । अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए डॉक्टर रामनरेश कृषि वैज्ञानिक से 91 82992 84293 नंबर पर बात कर सकते हैं।
