
RKTV NEWS/पटना (बिहार)21 मई।राज्य में दलितों के साथ निरंतर हो रही उत्पीड़न एवं आपराधिक घटनाओं को रोकने में वर्तमान नीतीश सरकार की विफलताओं को लेकर आज बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी, एस.सी. विभाग के प्रदेश प्रवक्ता आदित्य पासवान द्वारा एक प्रेस वार्ता का आयोजन बिहार विधानसभा परिसर स्थित सिजलर रेस्टोरेंट में किया गया. इस मौके पर हाल ही में दलित उत्पीड़न के शिकार हुए अनेकों परिवार के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा अपनी – अपनी आपबीती मीडिया से साझा किया. मीडिया को संबोधित करते हुए आदित्य पासवान ने कहा कि प्रदेश में दलितों के साथ निरंतर हो रही उत्पीड़न एवं आपराधिक घटनाओं को रोकने में वर्तमान नीतीश सरकार पूरी तरह से विफल है, तथा प्रत्येक मामले में पुलिस-प्रशासन का रवैया ऐसे मामलों को रफा-दफा करने तक ही सीमित है, जो बेहद शर्मनाक एवं दुखद है. आज के प्रेस वार्ता के दौरान पीड़ित परिवारों द्वारा साझा किये गए उनके अनुभवों ने नीतीश सरकार के दलित विरोधी चेहरे को बेनकाब कर दिया है. हाल ही में राज्य में दलितों के साथ घटित दुखद घटनाओं का जिक्र करते हुए श्री पासवान ने कहा कि दिनांक 14 मार्च 2025 को औरंगाबाद में 13 वर्षीय कोमल पासवान को उसके पड़ोसी मनोज सिंह, विनोद सिंह और सन्नी सिंह ने पहले जातिसूचक गालियां दीं और उसके बाद सन्नी सिंह ने 13 वर्षीय कोमल पासवान को गाड़ी से कुचल दिया, 13 मार्च 2025 को बिक्रमगंज अनुमंडल के कछवा थाना के लेवा गांव में 16 वर्षीय रचना पासवान की निर्ममता से हत्या कर दी गई, 18 अप्रैल 2025 को मुजफ्फरपुर के सरैया थाना के गुड़िगांवा में वहीँ के स्थानीय दबंगों ने पासवान समाज के बच्चों, महिलाओं एवं वृद्ध लोगों को बुरी तरह से पीटा और पूरा गांव जला देने की धमकी दी, 18 दिसंबर 2024 को मुजफ्फरपुर के सरैया थाना के चांदपुरा में वहीं के दबंगों ने पासवान समाज के बच्चों को सिर्फ इसलिए पीटा क्योंकि वो अच्छे कपड़े और मोटरसाइकिल पर चलते हैं। इन सभी घटनाओं में आज तक पीड़ित दलित परिवारों को न्याय सुनिश्चित नहीं हो सका. मैं इस प्रेस वार्ता के माध्यम से सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए त्वरित न्याय की मांग करता हूँ. प्रदेश का दलित समाज सरकार की उपेक्षा से त्रस्त है, और अपनी मांगों को लेकर आंदोलनात्मक कारवाई करने को विवश है. इन सभी जगहों पर मैने दबाव बनाया तो थोड़ी करवाई तो शुरू में हुई लेकिन कुछ दिनों के पश्चात पुलिस का संवेदनहीन और पक्षपातपूर्ण रवैया शुरू हो गया जिसके फलस्वरूप इनको आज तक न्याय नहीं मिल रहा और सारे मामले सिर्फ कानूनी पेंच में ये फंस के रह गए हैं.
