ब्यूटीशियन,सिलाई,कंप्यूटर और मिथिला पेंटिंग में हुनर सीखने की अपील।
RKTV NEWS दरभंगा(बिहार)28मई।दरभंगा जिले में आयोजित महिला संवाद कार्यक्रमों की बढ़ती श्रृंखला में महिलाओं की भागीदारी लगातार सशक्त और वृद्धि हो रही है।
बेनीपुर प्रखंड में आयोजित एक ऐसे ही संवाद कार्यक्रम में डीपीएम डॉ.ऋचा गार्गी ने सहभागिता और उपस्थित महिलाओं को जीविका से जुड़ने को प्रेरित की।
उन्होंने कहा कि जीविका एक ऐसा माध्यम है जिससे महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि स्वास्थ्य,रोजगार,सामाजिक चेतना और महिला सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सशक्तिकरण हो रहा है।
डॉ.गार्गी ने अपील की कि जो महिलाएं अब तक किसी कारणवश जीविका से नहीं जुड़ पाई हैं,वे आगे आकर इससे जुड़ें, ताकि उन्हें भी विकास के अवसर प्राप्त हो सकें।
उन्होंने बताया कि आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर समूहों में जोड़ा जा रहा है।
बीपीएम राजन कुमार ने बताया कि बिहार राज्य महिला सशक्तीकरण नीति का उद्देश्य महिलाओं को समान अवसर और भागीदारी प्रदान करना है।
उन्होंने कहा कि यह नीति लैंगिक हिंसा के प्रति जागरूकता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और शासन तंत्र में महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है।
महिला संवाद कार्यक्रम इस नीति को गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रभावशाली माध्यम बन चुका है।
कार्यक्रम में पोहदी पंचायत के मिथिला ग्राम संगठन की सदस्य विजय लक्ष्मी देवी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा जीविका से जुड़ने के बाद जीवन में अंधकार की जगह प्रकाश आया।
पीएम-एफएमई योजना के तहत ₹3.72 लाख का आसान ऋण मिला,जिससे मैंने आटा चक्की और मसाला पीसने की मशीन खरीदी। आज इससे मेरी आजीविका चल रही है और परिवार में खुशहाली आई है।”
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने आज की आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तकनीकी प्रशिक्षण की मुफ़्त सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की।
उन्होंने विशेष रूप से ब्यूटीशियन कार्य,सिलाई-कढ़ाई, कंप्यूटर प्रशिक्षण और मिथिला पेंटिंग जैसे कौशलों में प्रशिक्षण की आवश्यकता जताई,जिससे वे आजीविका से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी ली और शिक्षा,स्वास्थ्य,जलजमाव, वृद्धावस्था पेंशन, सोलर लाइट,सामुदायिक भवन,रोजगार और सिंचाई जैसे जमीनी मुद्दों पर खुलकर चर्चा की। साथ ही लघु एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की भी मांग की गई।
जीविका से जुड़ने के बाद कई महिलाओं ने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए,जिससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ,बल्कि उन्हें समाज में नई पहचान और सम्मान भी मिला। इन सफलताओं ने अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है और आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास प्रदान किया है।
यह कार्यक्रम बिहार के ग्रामीण परिदृश्य में सामाजिक बदलाव का वाहक बन रहा है।

