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केन्‍द्रीय मंत्री गजेन्‍द्र सिंह शेखावत और किरेन रिजिजू ने राष्ट्रीय संग्रहालय में वैसाक दिवस समारोह में बुद्ध को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

राष्ट्रीय संग्रहालय ने बुद्ध पूर्णिमा पर पवित्र अवशेषों की विधि-विधान के साथ उपासना की।

बुद्ध जयंती श्रद्धा, संस्कृति और रचनात्मकता के साथ मनाई गई।

RKTV NEWS/ नई दिल्ली 12 मई।बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर, जिसे वैसाक या बुद्ध जयंती के नाम से भी जाना जाता है, नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की विधि-विधान के साथ उपासना की गई, जो भक्ति, संस्कृति और कलात्मक अभिव्यक्ति से ओतप्रोत एक आयोजन था।
समारोह में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की अगुवाई में पुष्पांजलि अर्पित की गई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से केन्द्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने वैश्विक बौद्ध समुदाय को शुभकामनाएं दीं और आज की दुनिया में बुद्ध की करुणा और सद्भाव की शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने पवित्र अवशेषों के प्रति इतनी व्यापक भागीदारी और श्रद्धा देखकर गहरी संतुष्टि व्यक्त की।
केन्‍द्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्‍द्र सिंह शेखावत ने बुद्ध के जीवन की घटनाओं, विशेष रूप से आठ महान चमत्कारों (अष्टमहाप्रतिहार्य) को दर्शाने वाले स्तंभों में से एक पर ध्यान केन्‍द्रित किया। मेहमानों ने महायान और वज्रयान बौद्ध धर्म में विभिन्न बौद्ध देवताओं की प्रतिमाओं के प्रति कौतुहल दिखाया, जिसमें बोधिसत्व, मुकुटधारी बुद्ध, पारलौकिक बुद्ध (पंचतथागत), देवी और सहायक देवता (इष्टदेवता) शामिल हैं।
इस शुभ अवसर पर राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक गुरमीत सिंह चावला; अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महानिदेशक अभिजीत हलदर; और संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री समर नंदा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति श्रद्धेय भिक्षुओं, विद्वानों और आगंतुकों के साथ शामिल हुए।
मंत्रियों ने बुद्ध गैलरी का दौरा किया, जिसमें कला और पुरावशेषों के लुभावने संग्रह के माध्यम से भगवान बुद्ध के जीवन, शिक्षाओं और स्थायी दर्शन की खोज के बारे में जानकारी दी गई। उत्तर प्रदेश के पिपरहवा से खुदाई करके लाए गए कपिलवस्तु के अवशेष विशेष सम्‍मान दिया गया और वह गैलरी में मुख्‍य आकर्षण का केन्‍द्र थे।
प्रदर्शनी में बौद्ध धर्म के विकास को मथुरा और गांधार में प्रारंभिक प्रतीकात्मक चित्रण से लेकर सारनाथ, पाल, चोल और भौमकारा काल के दौरान इसके शैलीगत विकास तक दर्शाया गया है। महायान और वज्रयान परंपराओं में बोधिसत्व, पंचतत्वगत और इष्टदेवता की प्रतिमाओं ने आध्यात्मिक और कलात्मक अनुभव को समृद्ध किया।
इस पवित्र अवसर को और भी अधिक जीवंत बनाने के लिए थंगका गैलरी ने भी चार चांद लगा दिए, जहाँ भावचक्र (जीवन का पहिया) सहित बेहतरीन स्क्रॉल पेंटिंग ने दर्शकों का मन मोह लिया। मंत्रियों ने इन भक्ति कलाकृतियों में परिलक्षित प्रतीकात्मकता और ध्यानपूर्ण मूल्य की गहराई की प्रशंसा की।
समारोह के समापन पर, युवा और वृद्ध सभी आगंतुकों ने इंटरैक्टिव कार्यशालाओं और डीआईवाई काउंटरों की श्रृंखला में भाग लिया, जिसमें प्रार्थना ध्वज निर्माण, बौद्ध प्रतिमा विज्ञान सीखना, थंगका कलरिंग शीट, सेल्फी बूथ, लघु बुद्ध शिल्पकला और बौद्ध फिल्म प्रदर्शन जैसी गतिविधियां शामिल थीं।
बुद्ध गैलरी पूरे दिन जनता के अवलोकन के लिए खुली रही, जिसमें इस अत्यंत पवित्र दिन पर भगवान बुद्ध की चिरस्थायी विरासत और आध्यात्मिक मार्गदर्शन को दर्शाया गया।

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