
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)08 मई।श्रीमती तेतरा उच्च विद्यालय + 2 रन्नी डुमरियां के तत्वावधान में छात्र-छात्राओं के हित में ‘ सफलता के मंत्र ‘ पर एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो डा जंग बहादुर पाण्डेय ने मुख्य अतिथि के रूप मे इस विषय पर गहन प्रकाश डाला। डा पाण्डेय ने कहा कि नीति कहती है कि संसार में अपना कल्याण चाहने वालों को 7 जगहों पर बुलाए जाने पर भी वहाँ नहीं जाना चाहिए,चले गये तो वहां नहीं रहना चाहिए और रह गये तो किसी से नहीं कहना चाहिए – वेश्यालय,मदिरालय, जुआलय,हिंसालय,चिकित्सालय, न्यायालय और नरकालय और 7 जगहों पर बिना बुलाए भी वहां अवश्य जाना चाहिए, वहां रहना चाहिए और मौका मिले तो वहां कुछ न कुछ कहना चाहिए -विद्यालय, पुस्तकालय, अनाथालय, अनुसंधानालय,शिक्षकालय,देवालय और स्वर्गालय। जहाँ हमें बिन बुलाए जाना चाहिए वहाँ जाने से कतराते हैं और जहाँ नहीं जाना चाहिए वहाँ बिन बुलाए चले जाते हैं।डा जे बी पाण्डेय ने कहा कि भारत युवाओं का देश है और युवाओं के पास जोश है और बुजुर्गों के पास होश है।यदि युवा अपने जोश में बुजुर्गों के होश को मिला दें, तो सफलता उनके चरण चूमेगी। इन्होंने कहा कि सफलता के लिए मन को नियंत्रित करना परमावश्यक है और मन को एकाग्र करने का एक अमोघ अस्र है -मन के पहले ‘ न ‘ लगाएं शब्द बनेगा नमन। नमन से मन का अहंकार दूर होगा और मन शांत होगा और मन शुभ कार्य की ओर अग्रसर होगा। मन के पीछे ‘ न ‘ लगाएं शब्द बनेगा मनन। एकाग्र होकर अध्ययन और चिंतन करने की क्रिया का नाम मनन है। नमन और मनन
से ज्ञान की प्राप्ति मनोवांछित फल की प्राप्ति यानि सफलता।सूखी उम्मीदो की कोई डाली नहीं होती,
बंद किस्मत की कोई ताली नहीं होती।
झुक जाए जो मां बाप और गुरु के चरणों में,उसकी झोली कभी खाली नहीं होती।
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे सेवा निवृत प्रधानाध्यापक डा महेन्द्र कुमार राय रसिक ने कहा कि यह हम सबके लिए गौरव का संदर्भ है कि रांची से आकर प्रो डा जे बी पाण्डेय हमारे छात्र-छात्राओं को सफलता के राज जैसे महत्वपूर्ण विषय पर मंत्र दे रहे हैं। संगोष्ठी के संयोजक अनिल कुमार दूबे ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने माता पिता और गुरु की बात आंख मूंदकर मान लेनी चाहिए, इसी में उनका कल्याण है। विशिष्ट अतिथि के रूप में डुमरिया के सुप्रसिद्ध रामायणी अरुण कुमार सिंह ने कहा कि अभिवादन शीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविन:।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते,आयुर्विद्या यशो बलम्।
उन्होंने कहा कि हमें परशुराम से सफलता का मंत्र सीखना चाहिए। जीवन में सफलता के लिए शस्त्र और शास्त्र दोनों का ज्ञान अपेक्षित है। संगोष्ठी का समाहार करते हुए विद्यालय के वरीय शिक्षक राघव सिंह ने कहा कि ईच्छा -शक्ति, बुद्धि, कल्पना ,मेहनत और लगन से कामयाबी पाई जा सकती है।
अतिथियों का भव्य स्वागत विद्यालय के विद्वान प्राचार्य अभिषेक कुमार ने, सरस्वती वंदना विद्यालय की हिंदी शिक्षिका संजू कुमारी गुप्ता एवं सरिता कुमारी, संस्कृत शिक्षिका सोनी कुमारी एवं राजनीति विज्ञान की शिक्षिका आरमा रंजन के नेतृत्व में विद्यालय की छात्राओं ने, सुंदर संचालन अनिल कुमार दूबे ने,फोटो ग्राफी आमोद रंजन ने तथा धन्यवाद ज्ञापन राघव सिंह ने किया। कार्यक्रम का समापन शांति पाठ एवं राष्ट्रगान से हुआ।
