
रांची/झारखंड (डॉ अजय ओझा, वरिष्ठ पत्रकार) 07 मई।जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के 14 दिन बाद भारत ने आतंक के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के रूप में बड़ी कार्रवाई की। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना की संयुक्त ताकत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को सटीकता से से ध्वस्त कर दिया।
कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस मिशन के दौरान आतंकियों के 9 ठिकानों को सफलतापूर्वक नष्ट किया गया। कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान खास ख्याल रखा गया कि आम नागरिकों और निर्दोष लोगों को निशाना न बनाया जाए।
भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला ले लिया है। इंडियन आर्मी, वायु सेना और नौसेना ने मिलकर 6-7 मई की दरमियानी रात को पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (POJK) में नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया। इन ठिकानों पर लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन के 900 आतंकियों को निशाना बनाया गया। भारत ने पाकिस्तान पर हुई इस कार्रवाई को ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया है, जिस पर ब्रीफिंग के लिए इंडियन आर्मी ने प्रेंस कांफ्रेंस की।
प्रेस कांफ्रेंस में सेना ने बताया कि लक्ष्यों के बारे में आर्मी के पास विश्वस्त जानकारी थी, जिसके आधार पर ऑपरेशन को लॉन्च किया गया और साल 2008 के मुंबई आतंकी हमले की साजिश भी यहीं रची गई थी। भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी ने कहा कि इस बात का खास ख्याल रखा गया कि कोई आम नागरिक निशाना न बनें। सिर्फ आतंकी संगठनों को निशाना बनाया गया।
कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर ब्रीफिंग दी। उन्होंने बताया कि 6 और 7 मई की रात को 1:05 बजे से 1:30 बजे तक ऑपरेशन चला। 9 आतंकी कैंप को बर्बाद किया गया। कर्नल सोफिया ने बताया कि विश्वसनीय सूचनाओं के आधार पर इन लक्ष्यों का चयन किया गया, निर्दोष नागरिकों को नुकसान न पहुंचे, इसका ख्याल रखा गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अगर किसी भी प्रकार की हिमाकत करेगा तो उसका करारा जवाब दिया जाएगा।
कर्नल सोफिया कुरैशी ने कहा कि पहलगाम के विभत्स हमले के शिकार मासूम नागरिकों और उनके परिवार को न्याय देने के लिए ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया गया था। इस कार्रवाई में 9 टेरेरिस्ट कैंप्स को निशाना बनाया गया और पूरी तरह से इन्हें बर्बाद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में तीन दशकों से टेरेरिस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण हो रहा है। ऑपरेशन में रिक्रूटमेंट सेंटर, ट्रेनिंग एरिया और लॉन्च पैड्स को तबाह किया गया है, जो पाकिस्तान और पीओजेके में फैले हैं।
कर्नल सोफिया कुरैशी ने पहले पीओके में तबाह आतंकी संगठनों के बारे में ब्रीफिंग दी। उन्होंने बताया कि हमले में तबाह मुजफ्फराबाद का सवायनाला कैंप पीओजेके के लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC) से 30 किमी की दूरी पर है। यह लश्कर-ए-तैयबा का ट्रेनिंग सेंटर था, जहां से पिछले साल अक्टूबर में हुए सोनमर्ग और गुलमर्ग हमले और अब 22 अप्रैल के पहलगाम हमले के आतंकियों ने इसी ट्रेनिंग सेंटर से ट्रेनिंग ली थी।
कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया कि मुजफ्फराबाद का सईदना बिलाल कैंप भी तबाह किया गया है, जो जैश-ए-मोहम्मद का स्टेजिंग एरिया है और हथियार, विस्फोटक और जंगल सर्वाइवल ट्रेनिंग का केंद्र भी था। वहीं, कोटली का गुलपुर कैंप एलओसी से 30 किमी की दूरी पर था और लश्कर-ए-तैयबा का बेस था। कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया कि ऑपरेशन में तबाह ये कैंप जम्मू-कश्मीर के रजौरी और पुंछ में एक्टिव था। 20 अप्रैल, 2023 में पुंछ और 9 अप्रैल, 2024 को तीर्थ यात्रियों की बस पर हुए हमले के आतंकियों को यहीं से ट्रेनिंग मिली थी।
ऑपरेशन सिंदूर में एलओसी से 9 किमी की दूरी पर मौजूद बरनाला कैंप भिमबर भी तबाह कर दिया गया है। कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया कि बरनाला कैंप हथियार, हैंडलिंग, IED और जंगल सर्वाइवल का प्रशिक्षण केंद्र था। कोटली के अब्बास कैंप पर लश्कर के फिदायीन तैयार होते थे और इसकी कपैसिटी 15 आतंकियों को ट्रेनिंग देने की थी।
पाकिस्तान के अंदर आतंकियों के जो ठिकाने तबाह किए गए हैं, उनमें पहला सियालकोट का सरजल कैंप है और अंतरराष्ट्रीय सीमा से यह 6 किमी की दूरी पर है। कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया कि मार्च, 2025 में जम्मू-कश्मीर के चार जवानों की हत्या में शामिल आतंकी यहीं ट्रेंड किए गए थे। दूसरा मेहमूना जोया सियालकोट हिज्बुल मुजाहिदीन का बहुत बड़ा कैंप था, जो जम्मू के कठुआ क्षेत्र में आतंक फैलाने का केंद्र था। उन्होंने बताया कि पठानकोट एयरबेस पर किया गया हमला इसी कैंप से प्लान और डायरेक्ट किया गया था।
भारत ने उस आतंकी ठिकाने को भी तबाह कर दिया है, जहां पर साल 2008 में 26/11 मुंबई हमले की साजिश रची गई थी। कर्नल सोफिया कुरैशी ने बताया कि मुरीदके के मरकज तैयबा टेरर कैंप से ही मुंबई हमले के लिए आतंकियों को ट्रेंड किया गया था। अजमल कसाब और डेविड हेडली को यहीं ट्रेनिंग मिली थी। ये कैंप इंटरनेशनल बॉर्डर से 18-25 किमी की दूरी पर मौजूद है।
कर्नल सोफिया कुरैशी ने आगे बताया कि जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर मरकज सुभानअल्लाह कैंप को भी नेस्तनाबूद कर दिया गया, जो इंटरनेशनल बाउंड्री से 100 किमी दूर है। ये रिक्रूटमेंट और ट्रेनिंग का केंद्र था और टॉप आतंकी भी यहां आया करते थे। कर्नल सोफिया कुरैशी ने साफ किया, ‘पाकिस्तान के किसी सैन्य ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया और न ही किसी तरह की नागरिक क्षति की कोई रिपोर्ट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे अभियान के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि किसी निर्दोष नागरिक को कोई नुकसान न पहुंचे, जिसके लिए एजेंसियों से प्राप्त इनपुट्स को बेहद गंभीरता से लिया गया। सवाईनाला कैंप, जो लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख ठिकाना माना जाता था, पहला लक्ष्य था। कर्नल कुरैशी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन में पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को निशाना नहीं बनाया गया।
इन स्पॉट को भारत ने किया अटैक
समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, प्रतिबंधित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के मुख्यालयों को निशाना बनाकर रात के समय नौ ठिकानों पर विशेष कार्रवाई की गई।
मरकज़ सुब्हान अल्लाह, बहावलपुर – जैश-ए-मोहम्मद (JeM) का ठिकाना
मरकज़ तैयबा, मुरिदके – लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का मुख्यालय
सरजल, टेहड़ा कलां – जैश-ए-मोहम्मद का अड्डा
महमूना जोया, सियालकोट – हिज्बुल मुजाहिदीन (HM) का ठिकाना
मरकज़ अहले हदीस, बरनाला – लश्कर-ए-तैयबा का अड्डा
मरकज़ अब्बास, कोटली – जैश-ए-मोहम्मद का केंद्र
मस्कर रहील शहीद, कोटली – हिज्बुल मुजाहिदीन का प्रशिक्षण शिविर
शवाई नाला कैंप, मुजफ्फराबाद – लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी शिविर
सैयदना बिलाल कैंप, मुजफ्फराबाद – जैश-ए-मोहम्मद का संचालन केंद्र
प्रधानमंत्री मोदी की निगरानी में चला मिशन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद पूरे ऑपरेशन पर रात भर नजर बनाए रहे। हमले खुफिया एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर सटीक रूप से अंजाम दिए गए। भारत की सभी तीन सेनाओं (थल, वायु और नौसेना) ने मिलकर इस संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम दिया।
क्या है ऑपरेशन सिंदूर ?
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद भारत ने 14 दिन के भीतर इसका मुंहतोड़ जवाब दिया। भारतीय वायुसेना ने 6-7 मई 2025 की रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। हमले में शामिल सभी पायलट और सैनिक सुरक्षित लौटे।
भारत ने कहाँ किया अटैक ?
1. बहावलपुर के अहमदपुर ईस्ट में जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ निशाने पर : चार हमले बहावलपुर के अहमदपुर ईस्ट में सुभान मस्जिद के पास हुए, जो जैश-ए-मोहम्मद और उसके प्रमुख मौलाना मसूद अजहर का प्रमुख अड्डा माना जाता है।
2. आतंकी ठिकाने निशाना बने : मुजफ्फराबाद स्थित बिलाल मस्जिद और सुभान मस्जिद जैसे स्थानों पर हमले किए गए, जिनका संबंध आतंकवादी गतिविधियों से बताया गया है। इन हमलों में 8 आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
3. सियालकोट, कोटली और मुरीदके सहित कई जगहों पर हमले : डीजी आईएसपीआर ने सियालकोट, मुरीदके, कोटकी लोहारा, शकरगढ़ और कोटली जैसे इलाकों में भी हमलों की पुष्टि की, जिससे पाकिस्तान में खलबली मच गई।
4. बालाकोट के बाद दूसरी बड़ी जवाबी कार्रवाई : यह ऑपरेशन 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान में भारत की दूसरी बड़ी जवाबी कार्रवाई मानी जा रही है। पुलवामा हमले के बाद हुई बालाकोट स्ट्राइक के छह साल बाद एक बार फिर भारत ने निर्णायक जवाब देकर आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति स्पष्ट की है।
5. ऑपरेशन में निशाना बनाए गए 9 ठिकानों में से 4 पाकिस्तान के अंदर और 5 पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में थे। पाकिस्तान के जिन शहरों में हमले हुए उनमें बहावलपुर, मुरीदके और सियालकोट प्रमुख हैं। हमलों के लिए लोइटरिंग म्यूनिशन और अन्य सटीक हथियार प्रणालियों का उपयोग किया गया।
6. भारत के 24 मिसाइल हमलों की पुष्टि : पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता और आईएसपीआर के डीजी लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत ने कुल 24 हमले किए हैं, जो विभिन्न प्रकार के हथियारों से किए गए।
7. अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, सऊदी अरब और यूएई जैसे प्रमुख देशों को भारतीय अधिकारियों ने इस कार्रवाई की पूरी जानकारी दी.
8. ऑपरेशन सिंदूर के बाद की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, जम्मू संभागीय आयुक्त ने घोषणा की कि जम्मू, सांबा, कठुआ, राजौरी और पुंछ जिलों में आज सभी स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे।
9. भारत की सभी तीन सेनाओं (थल, वायु और नौसेना) ने मिलकर इस संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम दिया।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ न केवल पाक को जवाब है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक क्षमता का भी प्रमाण है। यह स्पष्ट करता है कि अब भारत आतंक को उसकी भाषा में जवाब देने से पीछे नहीं हटता।
