
RKTV NEWS/दरभंगा(बिहार)29 अप्रैल।दरभंगा जिला के हनुमाननगर प्रखंड के नेयाम छतौना पंचायत के किसान प्रमोद राय का जीवन संघर्षपूर्ण रहा है।
प्रमोद राय ने कहा कि मेरे पास दो (02) हेक्टेयर जमीन खेती योग्य है। मैं अपनी खेती परंपरागत तरीके से करता आ रहा हूं। इतनी जमीन होने के बावजूद भी अन्न का अभाव रहता था जो सालों भर मेरे परिवार के लिये अपर्याप्त होता था।
आठ से दस माह के बाद बाजार से खाने के लिए अनाज खरीदना पड़ता था, मेरा घर एवं खेती योग्य जमीन बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में रहने के कारण तीन से चार महीने बाढ़ के पानी से घिरा हुआ रहता है, जिसके कारण कीट व्याधि का प्रकोप बहुत ज्यादा रहता है, जिससे फसल लगाने के उपरान्त भी फसल नष्ट हो जाता है।
गेहूँ की खेती भी ठीक ढंग से नहीं कर पाता हूँ, मौसम एवं वर्षा भी ठीक-ठाक साथ देती है तो कीट व्याधि मेरे फसलों को नुकसान पहुँचा देती है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की जानकारी भी नहीं थी, जिसके कारण अच्छी आमदनी नहीं हो पाती थी।
उन्होंने बताया कि मेरे पूर्वजो से ही मेरे घर में गाय, बकरी पालन हो रहा था परन्तु वह भी परंपरागत तरीके से हो रहा था।
प्रमोद राय ने कहा कि पूर्व से परंपरागत तरीके से पशुपालन एवं बकरी पालन करता आ रहा था न हीं दुध एवं न मांस का उत्पादन कर पा रहा था, इसका मुख्य कारण यह था कि मुझे वैज्ञानिक तरीके से खेती एवं पशुपालन की जानकारी नहीं थी।
राय ने बताया कि बकरी को बीमारी से बचाव हेतु टीकाकरण दिया जाता है, इसकी भी मुझे कोई जानकारी नहीं होने के कारण मेरी बकरियों की आक्रांत मृत्यु हो जाती थी, असमय भारी नुकसान होने के कारण मैं दुखी रहता था।
मुझे आत्मा द्वारा राज्य के अंदर प्रशिक्षण हेतु बिहार कृषि विश्वविधालय साबौर (भागलपुर) में भेजा गया जहाँ मुझे प्रशिक्षण का अवसर प्राप्त हुआ जिससे मुझे वैज्ञानिक तरीके नवीनतम जानकारी के साथ-साथ उन्नत नस्ल की बकरी के पेट में पलने वाले कृमियों को नष्ट करने का तरीका, पशुओं का ससमय टीकाकरण, पशुओं के लिये आहार प्रबंधन विटामिन एवं खनिजों को आहार में मिलाये जाने के बारे में जानकारी प्राप्त हुई।
प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन करने लगा हूँ। आत्मा के माध्यम से मुझे हमेशा ससमय सहयोग मिला और मुझे अच्छी आमदनी होने लगी। आज मेरे पास अच्छी नश्ल की बकरियाँ जैसे बरबरी, सिरोही, ब्लैक बंगाल इत्यादि है।
सफलता से प्रेरित होकर अनेक किसानों ने पशुपालन करना शुरू किया जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है।
राय ने बताया कि अब वार्षिक आय लगभग दो लाख रूपये से अधिक की हो जाती हैं।
