“अग्नि दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हेतु समन्वित रणनीति – संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्व-तैनाती व सुरक्षा ऑडिट पर जोर”
RKTV NEWS/पटना(बिहार )06 फरवरी।बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सभाकक्ष में आज शुक्रवार को अग्नि सुरक्षा हेतु एक उच्च स्तरीय पूर्व-तैयारी बैठक का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. उदय कांत ने की। बैठक में प्राधिकरण के सदस्य पी.एन. राय, नरेंद्र कुमार, प्रकाश कुमार, सचिव मो. वारिस खान सहित विभिन्न हितधारक विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में राज्यभर में अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम, त्वरित प्रत्युत्तर व्यवस्था तथा जन-जागरूकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से व्यापक रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। विद्युत ट्रांसफार्मरों की नियमित जांच, गैस पाइपलाइन एवं सिलेंडरों की सुरक्षा ऑडिट, घरेलू एवं वाणिज्यिक गैस चूल्हों के मानक उपयोग की जांच तथा शॉर्ट सर्किट की घटनाओं की रोकथाम हेतु गुणवत्तापूर्ण वायरिंग सुनिश्चित करने जैसे बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया।
विद्यालयों, मॉल, बाजारों एवं भीड़भाड़ वाले स्थलों में फायर ऑडिट, फायर सेफ्टी सिस्टम की अनिवार्य जांच तथा अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। साथ ही घरों में फायर एक्सटिंग्विशर अथवा फायर बॉल जैसे उपकरण स्थापित करने के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। गैस सिलेंडरों पर संबंधित एजेंसी के द्वारा अग्नि सुरक्षा संबंधी जानकारी युक्त स्टिकर लगाने का भी निर्णय लिया गया, ताकि आपात स्थिति में लोग तत्काल आवश्यक कदम उठा सकें। विद्यालयों, बाजारों एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर आमजन को अग्नि दुर्घटनाओं से बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी जाएगी।
अग्नि दुर्घटनाओं की त्वरित रोकथाम एवं प्रभावी प्रत्युत्तर व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अगलगी प्रवण पंचायतों एवं प्रखंडों में अग्निशमन वाहनों की पूर्व-तैनाती की जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष अग्नि बचाव एवं जागरूकता अभियान संचालित किए जाएंगे, जिससे संभावित जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।
आपदा के समय समन्वित एवं दक्ष प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए बिहार अग्निशमन सेवा एवं अन्य संबन्धित विभागों के सहयोग से नियमित मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। स्थानीय नागरिकों को प्राथमिक अग्निशमन एवं बचाव संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा तथा फायर फाइटिंग डेमो के माध्यम से व्यावहारिक अभ्यास कराया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में सामुदायिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सके।
गृह विभाग के माध्यम से राज्य के चिन्हित 10 अग्नि प्रवण जिलों में विशेष निगरानी रखने तथा वहां जागरूकता गतिविधियों को सुदृढ़ करने का निर्णय लिया गया। बैठक में मौसम एवं सैटेलाइट डेटा के उपयोग से तापमान, आर्द्रता एवं पछुआ हवा के आधार पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग एवं पूर्व चेतावनी तंत्र को और प्रभावी बनाने पर बल दिया गया।
शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पृथक रणनीति अपनाने पर सहमति बनी। शहरी क्षेत्रों में शॉर्ट सर्किट जनित अग्नि घटनाओं पर नियंत्रण हेतु विशेष अभियान चलाया जाएगा तथा निम्न गुणवत्ता वाले बिजली तारों की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत प्रतिनिधियों एवं प्रशिक्षित सामुदायिक स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर स्थानीय स्तर पर अग्नि सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाएगा। अग्निशमन कार्यों में त्वरित जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रत्येक गाँव में पर्याप्त जल स्रोतों की पहचान एवं तैयारी करने का निर्देश दिया गया, ताकि आग लगने की स्थिति में तत्काल संसाधन उपलब्ध हो सकें।
मंच संचालन प्राधिकरण के वरीय सलाहकार डॉ. जीवन कुमार ने किया। बैठक में पंचायती राज, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा प्रबंधन विभाग, नगर निकाय, SDRF, NDRF, IOCL, AIIMS पटना सहित विभिन्न संस्थानों के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने पूर्व-तैयारी के माध्यम से राज्य में अगलगी से होने वाली क्षति के रोकथाम हेतु किए जा रहे प्रयासों पर अपने विचार साझा किए।

