
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)23 अप्रैल।22 अप्रैल को वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय पूर्ववर्ती छात्र संघ एवं वीर कुंवर सिंह स्मृति परिषद के संयुक्त तत्वावधान में ‘‘वर्तमान शाहाबाद में शिक्षा: दशा और दिशा’’ विषय पर प्रातः 10:30 बजे से जनंसवाद का आयोजन किया गया। जनसंवाद में सैकड़ो लोगों ने सहभागिता की। जनसंवाद में मुख्य अतिथि के रूप में पटना विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो0 (डॉ0) रास बिहारी सिंह शामिल हुए तथा अध्यक्षता जयप्रकाश विश्वविद्यालय के पूर्वकुलपति प्रो0 (डॉ0) दूर्गविजय सिंह ने किया। जनसंवाद का संचलान वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय पूर्ववर्ती छात्र संघ के महासचिव डॉ0 शशि कुमार सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन क्षेत्रिय +2 इन्टरस्तरीय विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ0 योगेन्द्र सिंह ने किया। जनसंवाद का उद्घाटन वीर कुंवर सिंह के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगीत के रचयिता एवं भौतिकी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो0 (डॉ0) बलराम सिंह द्वारा लिखित पुस्तक भोजपुरी गीतमाला ‘‘सन्तावन के बिगुल’’ तथा पूर्ववर्ती छात्र संघ द्वारा वीर कुंवर सिंह पर आधारित एवं डॉ0 शशि कुमार सिंह द्वारा संपादित तथा प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया गया। विषय परिवर्तन प्रो0 (डॉ0) नन्दजी दूबे ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में बोलत हुए पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो0 (डॉ0) रास बिहारी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता बढानी होगी। इसके लिए शोध कार्यो को प्राथमिकता देनी होगी साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलप करनी होगी। दुनिया में ऐसे-ऐसे विश्वविद्यालय है जिन्होंने कैब्रिंज 118 तथा ऑक्सफोर्ड ने 69 नोबेल पुरूस्कार विजेता दिए हैं जबकि पूरा भारत सिर्फ 12 नोबेल विजेता दिए है। अगर उनकी रोल मॉडल कार्यो को वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय अपनाएं तो बहुत कुछ उपलब्धि हासिल की जा सकती है। अध्यक्षीय सम्बोधन में प्रो0 (डॉ0) दूर्गविजय सिंह ने कहा कि विश्वविद्यायल चलाना कुलपति एवं विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारियों/पदाधिकारियो का दायित्व होता है। इसके अलावे सभी पदाधिकारियों, कर्मचारियों, प्राध्यापकों के अलावे जन सहयोग का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसके लिए पहल विश्वविद्यालय को ही करनी होगी।
इस अवसर पर अन्य वक्ताओं ने कहा कि हमें इस बात पर संतोष है कि इस आयोजन के संयोजक डॉ0 शशि कुमार सिंह के नेतृत्व में 22 दिसम्बर 2007 को संसद भवन में वीर कुंवर सिंह के तैल्यचित्र को स्थापित कराया गया। शाहाबादवासियों के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है क्योंकि स्वतंत्र भारत में वीर कुंवर सिंह को जो प्रतिष्ठा मिलनी चाहिए थी वह वषो के इंतजार के बाद तैल्यचित्र के स्थापना के साथ पूर्ण हुआ। वीर कुंवर सिंह के सम्पदा एवं स्मृति चिन्हों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर उचित रख-रखाव के लिए डॉ0 शशि कुमार सिंह ने पटना उच्च न्यायालय में लोकहित याचिका दायर की जिसपर उच्च न्यायालय ने अपना फैसला देते हुए सरकार को वीर कुंवर सिंह के धरोहरो के उचित रख-रखाव हेतु निर्देश जारी किये। यह डॉ0 सिंह की दूसरी सफलता थी। अब शाहाबाद में गिरते शैक्षणिक स्तर को उठाने की हमारी नैतिक जिम्मेवारी है जिसे हम हर हाल में पूरा करेंगे।जनसंवाद में शैक्षणिक वातावरण कायम करने तथा वितीय अनिमितता पर अंकुश लगाने के लिए सिविल सोसायटी से 11 सदस्यीय समिति का गठन किया गया जो उर्पयुक्त विषयों पर काम करेगा तथा इसकी हर महिने समीक्षा की जाएगाी। इस समिति के होंगे।
मंच संचालन करते हुए कार्यक्रम संयोजक डॉ0 शशि कुमार सिंह ने शैक्षणिक संस्थाओं में व्याप्त भ्रष्ट्राचार पर जीरो टालरेन्स की बात कही। डॉ0 सिंह ने कहा कि वीर कुंवर सिंह के नाम पर वर्षों पहले विश्वविद्यालय को हमारे प्रयास से दो करोड़ रूपये का संस्कृति मंत्रलय भारत सरकार द्वारा चेयर मिला और मंत्रलय ने पैसा ले जाने की बात लिखित रूप में कही। बार-बार कुलपतियों को इसके लिए कागजात उपलब्ध कराये गये और चेयर स्थापित करने हेतु आग्रह भी किया गया लेकिन दूभार्ग्यवश वीर कुंवर सिह विश्वविद्यालय ने इस दिशा में कोई पहल नही किया।
इस अवसर पर पटना विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो0 (डॉ0) रास बिहारी सिंह, जयप्रकाश विश्वविद्यालय के पूर्वकुलपति प्रो0 (डॉ0) दूर्गविजय सिंह, पद्म श्री डॉ0 भीम सिंह भवेश, प्रो0 नन्दजी दूबे, प्रो0 बलराम सिंह आदि को सम्मानित किया गया। प्रमुख व्यक्तियों में पूर्व प्राचार्या, महिला कॉलेज, प्रो0 कमल कुमारी, प्रो0 नंदजी दूबे, प्रो0 बलराज ठाकुर, पद्मश्री डॉ0 भीम सिंह भवेश, आचार्य मधेश्वर पाण्डेय, पूर्व डीन, प्रो0 पारस राय, क्षत्रिय प्रधानाचार्य डॉ0 योगेन्द्र सिंह, डॉ रेणु मिश्रा, पूर्व प्रचार्या डॉ0 कंचन प्रभा सिंह, डॉ0 भूपेन्द्र सिंह, निर्मल कुमार सिंह, डॉ0 योगेन्द्र सिंह, डॉ0 ममता मिश्रा आदि उपस्थित थे।
