
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)21 अप्रैल।वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा भोजपुर बिहार के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के पीएच डी कोर्स वर्क के शोधार्थी के लिये विभागाध्यक्ष डॉ दीपक वर्धन की अध्यक्षता में शोध स्वरूप एवं प्रक्रिया विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई । राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय कांके रांची के सहायक प्राध्यापक डॉ ओम प्रकाश ने कहा कि ज्ञान के प्रति सतत् जागरूकता ही उत्तम शोधार्थी का परम धर्म है। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए रांची विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो (डॉ) जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि शोध की यात्रा ज्ञान की यात्रा है। शोध समस्या नहीं, समाधान है।शोध की यात्रा जिज्ञासा से प्रारंभ होती है। जिज्ञासा , आवश्यकता, योग्यता, तत्परता और धैर्य एवं विश्वास से नवीन सत्यान्वेषण होता है। उन्होंने कहा कि ज्ञात साधनों से अज्ञात सत्य को वैज्ञानिकता और तटस्थता के साथ ज्ञात करना शोध है। उन्होंने संस्कृत वांग्मय के सबसे बड़े महाकवि कालिदास के मालविकाग्नि मित्रों के श्लोक को उद्धृत करते हुए कहा कि:-
पुराणमित्येव न साधु सर्वं,न चापि काव्यं नवमित्येववद्यम्।*
*संत:परीक्षांतरत् भजंते,मूढ़:पर प्रत्ययैनेव बुद्धि:।
अर्थात् पुराना सब कुछ अच्छा ही नहीं होता है और सब नया खराब ही नहीं होता है। विद्वान उत्तम या अधम का निर्णय भली भांति परीक्षणोपरांत ही करते हैं।
हाल इतिहास के शोधार्थियों से खचाखच भरा था।सभी डा पाण्डेय के सारगर्भित व्याख्यान को सुनकर मंत्र मुग्ध थे।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत विभागाध्यक्ष डा दीपक प्रकाश वर्धन ने, सरस्वती वंदना शुभम् कुमार ने,संचालन डा वाकुरू जामा ने और धन्यवाद ज्ञापन डा शशि भूषण देव ने किया। राष्ट्रगान के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।
