
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)16 अप्रैल।श्रीहनुमान मंदिर मेदनीपुर में जीयरस्वामी जी महाराज के मंगला सुशासन में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ के प्रथम दिवस पर ब्रह्मपुरपीठाधीश्वर आचार्य धर्मेन्द्र जी ने कहा श्रीमद्भागवत कथा गोविंद कृपा से मिलती है,इसे साधना या साधन से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। श्रीमद्भागवत भगवान नारायण का वांगमयी स्वरूप है।इससे जन्म और मृत्यु दोनो सुधरती है।श्रीमद्भागवत कथा से जीवन की व्यथा मिटती है, लोक और परलोक बनता है।श्रीमद्भागवत के महात्म्य को बतलाते हुए आचार्य जी ने कौशिक संहिता, देवर्षि नारद की भक्ति से भेंट,ज्ञान वैराग्यमय का जाग्रति, धुंधकारी मुक्ति की कथा कहते हुए सप्ताह कथा श्रवन विधि को बतलाया। इन्होंने बताया की श्रीमद्भागवत में ,18000श्लोक,,12,स्कंध और 335,अध्याय है।इसके प्रथम स्कंध में अधिकार लीला, द्वितीय स्कंध मेंभक्ति अंग दर्शन लीला, तृतीय स्कंध मे सर्ग,चतुर्थ मे विसर्ग,पंचम स्कंध में स्थान लीला का दर्शन होता है।इसी तरह षष्ट स्कंध पैसण निरूपण लीला, सप्तम स्कंध मेंअतिवासना लीला, अष्टम स्कंध में स्तुति, नवम स्कंध मे ईशानलीला,दशम् स्कंद में निरोध लीला ,एकादश स्कंध मे मुक्ति लीला और द्वादश स्कंध में आश्रय लीला का दर्शन होता है। सब मिलाकर संक्षेप कहा जा सकता है कि श्रीमद्भागवत भक्त का चरित और भगवान की लीलाओं का बखान करता है। यह भगवान से मिलने का राजमार्ग है कथा के मुख्य यजमान रामानुज वैष्णव दास है। सप्ताह यज्ञ में आचार्य त्रिगुण जी मूल पाठ कर रहे हैं।अमरनाथ तिवारी पूजन अर्चन का कार्य संपादित कर रहे हैं । सप्ताह यज्ञ की पूर्णाहुति व भंडारा 21,,अप्रैल को होगा ।
