
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)25 मार्च।श्रीमद्भगवद्गीता को पढ़ना और समझना मुश्किल है। इस काम को आसान कर दिया है ब्रज किशोर पाठक ने। उन्होंने अपनी किताब ‘गीता सुगीता’ में गीता के 18 अध्याय का हिन्दी में बहुत ही सरल और सहज शब्दों के साथ पद्यानुवाद किया।पहले अध्याय को पढ़ना शुरू करेंगे तो अठारहवें अध्याय तक पढ़े बिना इस पुस्तक को नहीं छोड़ेंगे। हिन्दी में इतने सरल और सहज शब्दों के साथ श्रीमद्भगवद्गीता को शायद किसी ने समझाया हो। इस पुस्तक का लोपार्पण प्रोफेसर अरुण कुमार सिन्हा ने किया। प्रो.अरुण कुमार सिन्हा ने कहा कि ब्रज किशोर पाठक ने गीता को सुगम बनाकर लोकभाषा में प्रस्तुत किया। ये काम आसान नहीं था लेकिन ब्रज किशोर पाठक ने इसलिए आसानी से कर लिया क्योंकि इन्होंने गीता का अध्ययन किया है और उसे अपने जीवन में उतारा है। प्रो. अरुण कुमार सिन्हा ने कहा कि इस किताब के माध्यम से गीता के महत्व को आम लोगों को समझना आसान होगा। इन्होंने उम्मीद जताई कि इसे ज्यादा से ज्यादा लोग पढ़ेंगे और लाभान्वित होंगे।
बताते चलें की ब्रज किशोर पाठक बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे। बिहार और झारखंड दोनों राज्यों में अपनी सेवाएँ दी। बिहार के सीएम नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘जीविका’ को धरातल पर उतारने में बड़ी भूमिका निभाई। अवकाश के बाद भी करीब 12-13 साल तक जीविका के माध्यम से बिहार की सेवा की। प्रशासनिक सेवा में अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए इन्होंने हिन्दी की बड़ी सेवा की है। गद्य, पद्य, निबंध और कहानी में इनकी लेखनी का कोई जवाब नहीं है। बिहार के भोजपुर जिले के किशुनपुरा गाँव में जन्मे ब्रज किशोर पाठक 55 साल से निरंतर हिन्दी साहित्य की सेवा कर रहे हैं। इनके सैकड़ों आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। बिहार सरकार का फादर कामिल बुल्के पुरस्कार, रामधारी सिंह दिनकर राष्ट्रीय पुरस्कार समेत दर्जनों पुरस्कार इन्हें मिल चुके हैं।
