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छत्तीसगढ:खैरागढ़ विश्वविद्यालय की नाट्य प्रस्तुति बहादुर कलारिन को दिल्ली में मिली खूब सराहना।

छत्तीसगढ़ी भाषा में दी गई नाटक की प्रस्तुति।

खैरागढ़/छग (रवींद्र पांडेय) 17 फ़रवरी। दुनिया का सबसे बड़ा रंग महोत्सव भारत रंग महोत्सव वर्तमान में दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के नाट्य विभाग ने दिल्ली के श्रीराम सेंटर हॉल में 15 फरवरी को बहादुर कलारिन की नाट्य प्रस्तुति दी। इस नाटक की खास बात यह रही कि देश की राजधानी दिल्ली में छत्तीसगढ़ी भाषा में नाट्य प्रस्तुति होने के बाद भी दर्शकों की भीड़ बनी रही और नाटक को खूब सराहना मिली। विश्वविद्यालय के नाट्य विभागाध्यक्ष व अधिष्ठाता डॉ. योगेन्द्र चौबे के निर्देशन में नाट्य विभाग के छात्रों द्वारा बहादुर कलारिन की प्रस्तुति दी गई।

प्रसिद्ध लेखक हबीब तनवीर की रचना है बहादुर कलारिन

बहादुर कलारिन मानव जीवन की आत्मसंतुष्टि की कहानी है, जो प्रसिद्ध लेखक प‌द्मश्री हबीब तनवीर के द्वारा लिखी गई है। इस कहानी में मनुष्य की आत्मसंतुष्टि को दर्शाया गया है। नाटक के पात्र छछान छाड़ ने 126 शादियां कीं, फिर भी वह असंतुष्ट रहा। अंत में जब उसने अपनी मां को ही वासना की नजर से देखा तो बहादुर दंग रह गई। उसने फैसला कर लिया कि इस लड़के को खत्म कर देना बेहतर है। उसने बड़े प्यार से मिर्च मसाले वाला खाना उसके लिये तैयार किया और अपने हाथों से खिलाया। इधर बहुओं से कह दिया कि आज पानी भरने का काम बंद। बहादुर ने उनको कहलवा दिया कि छछान अगर पानी मांगने आए तो किसी घर से उसे पानी नहीं मिलना चाहिये। गांव वाले वैसे भी लड़के से बदगुमान थे, उन्हें बदला लेने का अवसर मिला और वो बहादुर की बात मान गये। जब छछान परेशान होकर प्यास से तड़ता हुआ घर वापस आया और मां से पानी मांगा तो मां ने जवाब दिया आज तो घर में बिल्कुल पानी नहीं है, तू खुद ही डोल लेकर कुएं से पानी निकाल ले। जब छछान डोल लेकर कुएं पर गया तो बहादुर ने उसे पीछे से कुएं में धक्का दे दिया और खुद अपने सीने में कटार भोंक ली। इस तरह कहानी का अंत होता है।

इन कलाकारों ने दी प्रस्तुति

अंतर्राष्ट्रीय भारत रंग महोत्सव के इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी नाटक बहादुर कलारिन को खूब सराहना मिली। इस नाटक में विश्वविद्यालय के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। बहादुर कलारिन के किरदार में ईशा बघेल रहीं वहीं बाप शनिदेव रहे। इस तरह छछान राजू यादव, राजा चंद्रहास बघेल, धोबिन भैरवी साहू, धोबी विकास, चैत विकास गायकवाड़, राजा के बेटे रवि, द्वारिका के किरदार में विकास व अनुराग रहे। भूलवा सोमनाथ साहू, देवीलाल अमन मालेकर, गोविंद रोहन जंघेल, हृदय दीपेश कहार, बहादुर की बहु डाली, दिव्या, दिशा, दीप्ति ओग्रे, आयुषी व भारतीय जांघेल रहीं। सरपंच बादल, समधी हर्ष गिरी भट्ट रहे। मंच से परे डॉ. परमानंद पांडे, पप्पू टांडिया, भुनेश्वर यादव और करण कुमार ने संगीत दिया। मंच व परिकल्पना अरुण भांगे एवं दीप्ति ओग्रे का था वहीं प्रकाश परिकल्पना पीएस मल्टयार की थी। नाट्य प्रस्तुति के दौरान एनएसडी के पूर्व निदेशक दिनेश खन्ना, वरिष्ठ रंग समीक्षक शिवकेश मिश्र, संगम पाण्डे एवं संस्कृति मंत्रालय के सीसीआरटी के अध्यक्ष प्रो. विनोद इंदुरकर विशेष रूप से उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि इसी भारत रंग महोत्सव का आयोजन खैरागढ़ में 4 से 9 फरवरी तक किया गया था।

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