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मत्स्यपालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में खारे जल में झींगापालन की समीक्षा के लिए बैठक की अध्यक्षता की।

नई दिल्ली/04 जनवरी।मत्स्यपालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में खारे जल में झींगापालन की समीक्षा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की।
इस बैठक के दौरान विभाग ने जलीय कृषि के लिए संभावित खारे भूमि संसाधनों के उपयोग की रणनीति बनाने के लिए राज्यों, आईसीएआर और अन्य एजेंसियों के सहयोग संबंधी प्रयासों पर जोर दिया। इसके अलावा यह रेखांकित किया गया कि खारे भूमि संसाधनों, जो कृषि के लिए उपयुक्त नहीं हैं, की क्षमता के उपयोग की जरूरत है। इसके लिए इन राज्यों में विशेष रूप से चिन्हित 25 जिलों में रोजगार और आजीविका उत्पन्न करने को लेकर झींगापालन को अपनाने के साथ झींगा के उपभोग के लिए जागरूकता उत्पन्न करना है। ये सभी चार राज्य यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके खारा प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए परियोजना संबंधी प्रस्तावों को पीएमएमएसवाई के तहत अपेक्षित सहायता के लिए अगले वर्ष की वार्षिक कार्य योजना में उचित रूप से शामिल किया जाए।
बैठक में इस बात पर सहमति बनी है कि इन राज्यों में लवणीय भूमि जलीय कृषि के लिए कई चुनौतियां हैं। इन समस्याओं का समाधान करने के उद्देश्य से इस बात की आवश्यकता भी महसूस की गई है कि आईसीएआर, राज्य मत्स्य पालन विभाग और अन्य एजेंसियों की सहायता से देश के उत्तरी हिस्से में झींगा की खपत को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा सकता है। इसका लक्ष्य इन राज्यों में चिन्हित 25 जिलों में संभावित सामूहिक और सांस्कृतिक क्षेत्र का सर्वेक्षण करना है।
आईसीएआर-सीआईएफई रोहतक केंद्र एवं राज्य मत्स्य पालन विभागों के बीच घनिष्ठ सहयोग से मत्स्य पालकों और उद्यमियों के लिए आईसीएआर-सीआईएफई रोहतक केंद्र तथा राजस्थान के चांदघोटी केवीके में कार्यशालाएं व प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। यह भी महसूस किया गया कि ताजे पानी/अंतर्देशीय तालाबों में सफेद झींगों के पालन के लिए मौजूदा दिशानिर्देशों की समीक्षा करने, आईसीएआर-सीआईएफई, रोहतक में उपलब्ध सुविधाओं को और बढ़ाने के लिए एक रोडमैप तैयार करने तथा टिकाऊपन और उत्तर भारतीय राज्यों में लवणीय जलीय कृषि के सतत विकास के लिए रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय स्तर की समिति का गठन किया जा सकता है।
भारत दुनिया का पहला झींगा पालक उत्पादक है। मूल्य के लिहाज से भारत के कुल समुद्री भोजन निर्यात में झींगे का योगदान 65% से ज्यादा है। भारत में खारे पानी की जलीय कृषि और लवणता प्रभावित क्षेत्रों में झींगा जलीय कृषि की व्यापक संभावनाएं हैं। भारत में खारे पानी वाले लगभग 1.2 मिलियन हेक्टेयर संभावित क्षेत्र हैं। इसके अतिरिक्त, तटीय क्षेत्रों में 1.24 मिलियन हेक्टेयर नमक से प्रभावित मिट्टी उपलब्ध है। आईसीएआर-सीआईबीए की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 8.62 मिलियन हेक्टेयर अंतर्देशीय लवणीय मिट्टी उपलब्ध है, लेकिन सिर्फ 1.28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही खेती होती है। सरकार का लक्ष्य अतिरिक्त 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को जलीय कृषि के अंतर्गत लाना है।
लवणता से प्रभावित क्षेत्र कृषि के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं। लेकिन इन क्षेत्रों को जलीय कृषि क्षेत्रों में तब्दील करने की बहुत बड़ी संभावना है। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्यों में संभावित अंतर्देशीय लवणीय क्षेत्रों को देखते हुए मत्स्य पालन विभाग ने बुधवार को सचिव स्तर पर समीक्षा बैठक की। मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त सचिव सागर मेहरा, उपरोक्त चार राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी और जिला मत्स्य अधिकारी, आईसीएआर के डीडीजी (मत्स्य विज्ञान) डॉ. जे. के. जेना, आईसीएआर-सीआईएफई मुंबई के निदेशक डॉ. रविशंकर, तटीय जलकृषि प्राधिकरण चेन्नई के सचिव डॉ. वसंत कृपा, डीओएफ के वरिष्ठ अधिकारी और आईसीएआर के वैज्ञानिक भी इस बैठक में शामिल हुए।

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