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इतिहास में पहली बार घग्घर से आईजीएनपी में स्थानांतरित किया जा रहा पानी!तटबंधों कि सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन के कार्यों कि प्रगति हेतु जिला कलक्टर ने ली बैठक।

हनुमानगढ़/राजस्थान 16 जुलाई । घग्घर नदी में लगातार बढ़ रही पानी कि आवक को देखते हुए जिला प्रशासन दिन-रात मुस्तैदी से कार्य कर रहा है । सभी व्यवस्थाओं और इंतजामों को बार बार परखा जा रहा है और पिछले दो दिनों से जिला कलक्टर रूक्मणि रियार स्वयं नदी के तटबंधों की सुरक्षा व्यवस्था जांच रही है । घग्घर सायफन से पीलीबंगा तक नाली बैल्ट के पूरे 53 किलोमीटर क्षेत्र में जिला कलक्टर और एसपी कई बार निरीक्षण कर चुके है । रविवार को आपदा प्रबंधन के कार्यों में लगे सभी अधिकारियों कि बैठक ली गई। जिला कलक्टर ने कहा कि हिमाचल, हरियाणा और पंजाब में जिस तरह से बाढ़ के हालात बने हुए है और ओटु हैड पर पानी बढ़ रहा है , हमे सजग रहने कि आवश्यकता है। 5 दिन के लिए बारिश का अलर्ट भी है, फील्ड में सभी अधिकारी अच्छा कार्य कर रहे है । ओटू हैड से 26 हजार क्यूसेक पानी रिलीज किया जा चुका है जो सोमवार सुबह तक पहुंच जाएगा । 25 वर्ष बाद इतना पानी आ रहा है, कई जगह से बीच में टूटा है परंतु घूमफिर कर इसी ड्रेनेज में पानी आएगा। गुलाचिका में एक लाख क्यूसेक से अधिक रीडिंग पहुंच गई थी, जो नीचे आ रहा है ।
जिला कलक्टर ने बताया कि इतिहास में पहली बार घग्घर सायफन से आईजीएनपी में पानी स्थानांतरित किया जा रहा है । गेट खोले जा चुके है और धीरे धीरे पानी स्थानांतरित हो रहा है । हालांकि अभी स्थानांतरण कि स्पीड धीमी है परंतु फ्लो के साथ बढ़ेगा । जिला कलक्टर ने कहा कि इंजीनियर की बात माने और एतिहायत बरते। ग्रामीणों को प्रोत्साहित करें कि बच्चों बुजुर्गों और महिलाओं को अन्यत्र शिफ्ट कर दें तथा मिट्टी को स्ट्रांग करें। गांव में गोताखोरों को चिन्हित करके रखें ताकि जरूरत पड़ने पर उनको काम में लिया जा सके। नगर परिषद से सुभाष बंसल ने बताया कि उन्होंने 25 निचले क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है, वहां के निवासियों से समझाइश की जा रही है । दस हजार मिट्टी के कट्टे भरकर तैयार किए गए हैं, एक पोकलेन मशीन, 6 जेसीबी और 5 ट्रैक्टर ट्रॉली आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार है ।
सीईओ अशोक असीजा ने बताया कि 32 निचले स्थानों को चिह्नित किया गया है, जिसके लिए कुल 55 राहत केंद्र चिह्नित किए गए है । ग्रामीण इलाकों में कुल 32 और शहरी इलाकों में 23 राहत केंद्रों पर रहने , खाने, पानी और बिजली की समुचित व्यवस्था की गई है ।उन्होंने बताया कि 53,000 लोगों को संभावित विस्थापित किया जाएगा। अभी फिलहाल डबली कुतुब में 72 लोग, 2 केएनजे में 3 लोग, राठीखेडा में 500 लोगों को उनकी इच्छा के आधार पर विस्थापित किया गया है । बैठक में डीटीओ ने विस्थापन के लिए लगाई गई बसों और सीएमएचओ ने दवाइयों और डॉक्टरों की टीम के बारे में बताया । एसडीआरएफ और एनडीआरएफ ने तटबंधो पर सहयोग के बारे में बताया । विद्युत विभाग के के के कस्वां ने बताया कि तटबंधों पर तात्कालिक व्यवस्था के लिए बेंटेरी ऑपरेटेड लाइट लगवाए ।

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