लौटने पर प्राचार्य एवं बर्सर ने किया सम्मानित।
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)02 नवंबर।एम.एम. महिला महाविद्यालय, आरा के मनोविज्ञान विभाग की वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक डॉ. विजयश्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महाविद्यालय का नाम रोशन किया है। उन्हें भारतीय स्वास्थ्य मनोविज्ञान अकादमी की ओर से थाईलैंड के फुकेत में 26 से 28 अक्टूबर 2026 तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशिष्ट वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था।
मुख्य विषय *‘Families of Transition: Psychological Pathways Across Cultures’* था। इसमें विभिन्न देशों के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, मनोवैज्ञानिकों एवं मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बदलती पारिवारिक संरचनाओं, पारस्परिक संबंधों, मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
डॉ. विजयश्री ने अपना व्याख्यान में वैवाहिक जीवन में आपसी सहमति, महिलाओं के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य और वैवाहिक संबंधों की गुणवत्ता के बीच संबंधों को विस्तार से समझाया।अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए बताया कि भारत की 60 विवाहित महिलाओं पर आधारित प्रारंभिक अध्ययन में 38.3 प्रतिशत प्रतिभागियों ने वैवाहिक जीवन में बिना सहमति के अंतरंग संबंधों के अनुभव की जानकारी दी। अध्ययन में यह भी सामने आया कि आपसी सहमति पर आधारित अंतरंगता का महिलाओं के मनोवैज्ञानिक कल्याण एवं वैवाहिक संबंधों की गुणवत्ता के साथ सकारात्मक और सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण संबंध है।
शोध के गुणात्मक विश्लेषण में विवाद से बचने के लिए सहमति जताना, वैवाहिक दायित्व के रूप में अंतरंगता को सामान्य मान लेना, भावनात्मक तनाव और संबंधों में भावनात्मक दूरी जैसे पहलू भी सामने आए। डॉ. विजयश्री ने स्वस्थ वैवाहिक संबंधों के लिए आपसी सहमति, सम्मान, भावनात्मक सुरक्षा और प्रभावी संवाद को आवश्यक बताया।विशिष्ट वक्ता के रूप में व्याख्यान देने के साथ ही डॉ. विजयश्री ने सम्मेलन के एक वैज्ञानिक सत्र की अध्यक्षता भी की। भारतीय स्वास्थ्य मनोविज्ञान अकादमी के अध्यक्ष प्रो. आनंद कुमार द्वारा आमंत्रित किया गया था।
थाईलैंड से महाविद्यालय लौटने पर प्राचार्य प्रो. डॉ. नरेंद्र प्रताप पलित एवं महाविद्यालय के बर्सर प्रो. राजीव कुमार ने डॉ. विजयश्री को सम्मानित किया तथा उनकी उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई और शुभकामनाएं दीं।उनकी सहभागिता से एम.एम. महिला महाविद्यालय, आरा तथा वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय की अकादमिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिली है।

