आखर के सौजन्य से भोजपुरी विभाग में पुस्तकालय और डिजिटल लाइब्रेरी सुविधा का उद्घाटन।
RKTV NEWS/ आरा (भोजपुर)25 अगस्त।वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग में आखर संस्था के सौजन्य से महेंद्र मिश्र पुस्तकालय का उद्घाटन और डिजिटल लाइब्रेरी सेवा का लोकार्पण सम्पन्न हुआ। पुस्तकालय सुविधाओं का उद्घाटन संयुक्त रूप से आखर संस्था के संजय सिंह, नवीन कुमार, मोहन श्रीवास्तव, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ एम के पांडेय और विभागाध्यक्ष प्रो दिवाकर पाण्डेय ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर सभागार में ‘भिखारी ठाकुर के रचनन प कुछ बिचार कुछ विमर्श : जुग संदर्भ में ‘ विषय पर व्याख्यान आयोजित हुआ। मुख्य वक्ता सत्यवती महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी के प्राध्यापक डॉ मुन्ना कुमार पाण्डेय ने कहा कि भिखारी ठाकुर भोजपुरी साहित्य संस्कृति के प्रस्थान बिंदु है। उनकी रचनाओं को एक खांचे में डालकर देखना, संकीर्ण जातीय दृष्टि से उसकी समीक्षा करना उनके लेखन का सही मूल्यांकन नहीं होगा। बिदेसिया और गबरघिचोर नाटकों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इन रचनाओं में उत्तर आधुनिक विमर्श दृष्टिगोचर होते हैं। अपने व्याख्यान में उन्होंने भिखारी ठाकुर की रचनाओं में नारीवादी दृष्टिकोण की भी चर्चा करते हुए कहा कि भिखारी ठाकुर एक युगधर्मी कलाकार थे और कलाकार जाति धर्म के बंधनों से ऊपर होता है। कार्यक्रम में आखर ट्रस्ट के संजय सिंह, मोहन श्रीवास्तव और नवीन कुमार ने आखर गद्य लेखन प्रतियोगिता और आखर के सहयोग से भोजपुरी विभाग की डिजिटल पत्रिका आरंभ करने की घोषणा की और छात्रों से भोजपुरी में मौलिक लेखन करने के लिए प्रोत्साहित किया। ज्ञात हो कि आखर ट्रस्ट की ओर से विभाग में नवनिर्मित महेंद्र मिश्र पुस्तकालय में छात्रोपयोगी कई सुविधाएं शुरू की गई हैं। बाद में शोधार्थी रवि प्रकाश सूरज की पीएचडी मौखिकी आगत अतिथियों, विश्वविद्यालय के शिक्षकों, छात्रों और कई भोजपुरी साहित्यकारों की उपस्थिति में सम्पन्न हुई। भोजपुरी आ छत्तीसगढ़ी लोकगथन के सामाजिक आ सांस्कृतिक अध्ययन विषय पर आधारित इस शोध कार्य को प्रो दिवाकर पाण्डेय के शोधनिर्देशन में पूरा किया गया है और बाह्य परीक्षक दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो एम के पांडेय थे।
रवि प्रकाश सूरज ने कहा कि भोजपुरी लोकगाथा भोजपुरी मौखिक परंपरा की तेजी से विलुप्त हो रही विधाओं में से एक है और यह शोधकार्य लोकगाथाओं के महत्त्व को समझने एवं इसके संरक्षण संवर्धन में उपयोगी साबित होगा। इस मौके पर अर्थशास्त्र विभाग के शिक्षक नीरज वर्मा, हिंदी विभाग के नवनीत राय, मुकेश कुमार, अंग्रेजी विभाग के आनंद भूषण पांडेय, भोजपुरी साहित्यसेवी जितेंद्र कुमार, कृष्ण कुमार, पत्रकार नरेंद्र सिंह, दिनेश त्रिपाठी, शोधार्थी और छात्र डॉ राजेश कुमार, डॉ संजय कुमार, डॉ यशवंत कुमार सिंह, सोहित सिन्हा, ढूनमुन सिंह आदि उपस्थित थे। विभाग के शिक्षकेतर कर्मचारियों मनोज कुमार, उत्तम तिवारी, नीलम कुमारी, बबीता देवी का उल्लेखनीय योगदान रहा।




