
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)16 जुलाई।रहमान मंजिल, चकिया में बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता सरफराज अहमद खान की अध्यक्षता में ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने देश की एकता, अखंडता और रक्षा के लिए उनके अदम्य साहस एवं सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरफराज अहमद खान ने ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान के जीवन और सैन्य योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 15 जुलाई 1912 को जन्मे ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान भारतीय सेना के उन वीर अधिकारियों में शामिल थे, जिन्होंने देश के विभाजन के समय भारत के प्रति अपनी निष्ठा को सर्वोपरि रखा। उन्हें पाकिस्तान की सेना में उच्च पद का प्रस्ताव दिए जाने की बात कही जाती है, लेकिन उन्होंने भारत में रहकर मातृभूमि की सेवा करने का निर्णय लिया।उन्होंने कहा कि 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ब्रिगेडियर उस्मान ने अदम्य साहस और कुशल सैन्य नेतृत्व का परिचय दिया। नौशेरा क्षेत्र की रक्षा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण वे ‘नौशेरा के शेर’ के नाम से प्रसिद्ध हुए। 3 जुलाई 1948 को जम्मू-कश्मीर के युद्ध क्षेत्र में दुश्मन की गोलाबारी में वे वीरगति को प्राप्त हुए।ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ किया गया तथा उन्हें दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।वक्ताओं ने कहा कि ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का जीवन देशभक्ति, साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय एकता की अनुपम मिसाल है। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देता रहेगा।कार्यक्रम में जसीम बारी, मस्नून आलम, शमशाद अहमद, शमीम अख्तर, शेख प्रिंस, कन्हैया कुमार, सोनू कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अंत में जसीम बारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
