श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया गया सद्ग़ुरुदेव महात्मा सुशील कुमार का अवतरण दिवस समारोह,५१ स्त्री-पुरुषों को दी गयी ‘शक्तिपात-दीक्षा’
RKTV NEWS/साकेत (दिल्ली), 13 जुलाई। मनुष्य की भौतिक-कामनाओं की पूर्ति के लिए ही ‘माँ मनोकामना देवी की स्थापना ब्रह्मलीन सदगुरुदेव महात्मा सुशील कुमार जी द्वारा की गयी थी। श्रद्धापूर्वक यहाँ प्रार्थना करने वालों की सदकामनाएँ अवश्य पूर्ण होती है। किन्तु मानव-जीवन का लक्ष्य यह नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति है, जिसके लिए साधना का मार्ग ही आवश्यक है।
यह बातें सोमवार को पर्यावरण कंपलेक्स स्थित माँ मनोकामना मंदिर में, अन्तर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के तत्त्वावधान में आयोजित, ‘माँ मनोकामना देवी’ की प्राण-प्रतिष्ठा की वर्षगाँठ और संस्था के संस्थापक ब्रह्मलीन सदगुरुदेव महात्मा सुशील कुमार के अवतरण दिवस समारोह में, अपना आशीर्वचन देती हुईं, संस्था की अध्यक्ष एवं ब्रह्मनिष्ठ सदगुरुमाता माँ विजया जी ने कही। माताजी ने कहा कि व्यक्ति प्रत्येक क्षण बदल रहा है। आज से २५ साल पहले व्यक्ति जैसा था, आज वैसा नहीं दिखता। कुछ वर्षों के पश्चात आज जैसा भी नहीं दिखेगा। शरीर में अनेक कोशिकाएँ हैं, समस्याएँ भी तनी ही हैं। इनसे मुक्ति का मार्ग ‘इस्सयोग’ की साधना है, जिसका प्रवर्त्तन ब्रह्मलीन सदगुरुदेव महात्मा सुशील कुमार जी ने किया। ‘इस्सयोग’ संसार को दिया गया, उनका अनुपम उपहार है।
माताजी ने कहा कि साधना और गुरुसेवा से मानसिक विकार दूर होते हैं। विकार दूर होने से कष्ट दूर होते हैं। यह जानकारी देते हुए, संस्था के संयुक्त सचिव डा अनिल सुलभ ने बताया कि समारोह का उद्घाटन, पूर्वाह्न १० बजे, श्रीमाँ के निदेशानुसार, संस्था के संयुक्त सचिव-सह-कोषाध्यक्ष ई उमेश कुमार ने दीप-प्रज्वलित कर किया। सदगुरुदेव के चित्र पर माल्यार्पण संस्था के सचिव कुमार सहाय वर्मा ने किया। पं प्रभात झा द्वारा किए गए ‘गुरु शतनाम स्तोत्र’ के पाठ से कार्यक्रम का विधिवत आरम्भ हुआ। इसके पश्चात एक घंटे के अखंड संकीर्तन, आधे घंटे की आह्वान की साधना, पूज्य गुरुदेव की आरती और फिर माँ मनोकामना के विधिवत पूजन और आरती की गयी।
इस अवसर पर इस्सयोगियों ने अपने भावोदगार व्यक्त किए, जिनमें लंदन से आए अभिषेक आनन्द, लुधियाना के सुधांशु सुमन, उड़ीसा से दुर्गादास पण्डा, भुवनेश्वर से दा गीता जेना, लखनऊ से दुष्यंत यादव, बोकारो से कैलाश सुहासरिया, बंगलुरु से हरि पण्डा, फ़रीदाबाद से वंदना कर्ण, बिहार से शैल कुमारी, ऋतुबाला, हरियाणा से श्रीकांत कुमार, मनीषा अग्रवाल, अल्पना श्रीवास्तव, सविता कुमारी के नाम सम्मिलित है।
संस्था के सचिव कुमार सहाय वर्मा ने अपने संबोधन में माँ मनोकामना मंदिर की स्थापना का संक्षिप्त इतिहास प्रस्तुत किया तथा पूज्य सदगुरुदेव और गुरुमाँ की कृपाओं के लिए कृतज्ञता ज्ञापित की। इस अवसर पर शक्तिपात-दीक्षा का कार्यक्रम भी संपन्न हुआ, जिसमें ५१ नव-जिज्ञासुओं को माताजी द्वारा, इस्सयोग की आंतरिक साधना आरंभ करने हेतु आवश्यक ‘शक्तिपात-दीक्षा’ दी गयी।
समारोह में, संस्था के संयुक्त सचिव लक्ष्मी प्रसाद साहू, संगीता झा, शिवम् झा, सरोज गुटगुटिया, दीनानाथ शास्त्री, सी एल प्रसाद, वंदना वर्मा, डा जेठानंद सोलंकी, डा दार्शनिका पटेल, माया साहू, विजय मालिनी, योगेन्द्र प्रसाद, डा जेठानंद सोलंकी, राधेश्याम पाण्डेय, गिरिजेश गुप्ता, वीरेन्द्र राय, ललन प्रसाद, आर सी तिवारी, विजय रंजन, ममता जमुआर, मंजिता अंजलि तथा विनोद तकियावाला समेत देश के विभिन्न प्रांतों से आए सैकड़ों की संख्या में इस्सयोगी उपस्थित थे।

