जुग जुग जियो सु ललनवां…. सोहर आज भी आयोजनों में होते है गुंजायमान।
RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)26 जून।भोजपुरी के मशहूर गीतकार डॉ राम नाथ पाठक “प्रणय जी” ने अपने गीतों के माध्यम से भोजपुरी भाषा को एक ऐसे मुकाम पर लाया था जहाँ सिर्फ उनके गीत देश ही नहीं वरन विदेशों में भी काफी लोकप्रियता के साथ गुनगुनाए जाते थे और आज भी यथावत है।
उनके लिखे गीत अंतःमन की गहराइयों तक पहुंच जाते थे और मानसिक प्रसन्नता के साथ साथ मन को पुलकित भी करते थे। इन्होंने सभ्य गीतों से भोजपुरी की गरिमा को कायम रखा था। लेकिन दुर्भाग्य है कि आज के गीतकार सिर्फ भोजपुरी के नाम पर अपनी और सिर्फ अपनी आमदनी को ध्यान में रखते है और भोजपुरी की गरिमा को द्विअर्थी गीतों के माध्यम से धूमिल कर रहे हैं।
भोजपुरिया समाज में प्रणय जी के गीत आज भी प्रासंगिक है। इनके नाम से मिले सम्मान को पाकर मैं खुद गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।
उक्त बातें भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के जानेमाने अभिनेता और निर्देशक दीप श्रेष्ठ ने गुरुवार को आरा के जैन कॉलेज में प्रणय जी की 105 वीं जयंती पर आयोजित समारोह के दौरान अपने मुख्यातिथिय संबोधन में कही।
उन्होंने ऐसे आयोजनों के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए मशहूर गीतकार वीरेंद्र पांडेय के हाथों मिले सम्मान के प्रति भी अपना आभार प्रकट किया।
श्री श्रेष्ठ ने कहा की आरा शहर मेरी ज़िन्दगी की कर्मभूमि रही है यही हमने अपनी फ़िल्म माई के दुलार के गीतों को गीतकार विरेंद्र पाण्डेय जी से लिखवाया था यहॉ के सभी गीतकारों साहित्य कारों को नमन करता हू।

