
RKTV NEWS/आरा(भोजपुर )25 जून। स्थानीय जेल रोड स्थित सिद्धांत भवन में विगत एक सप्ताह से लगा प्राचीन पांडुलिपि प्रदर्शनी आज समाप्त हुआ तथा बाहर से आए लोगो ने इस प्रदर्शनी से जैनिज्म, प्राच्य विद्या आदि की जानकारी हासिल की।
विदेशों में यह भवन ओरिएंटल लाइब्रेरी के नाम से जाना जाता है और उत्तर भारत में इसे जैनिज्म और प्राच्य विद्या के सर्वाधिक महत्वपूर्ण केंद्रों में से जाना जाता है।यहां अनेकों भाषा में दुर्लभ से दुर्लभ पांडुलिपि रखी हुई है।वर्ष 1903 में शहर के रईस देव कुमार जैन ने कबाड़ में कुछ पांडुलिपि देखी और उसे खरीदते हुए और जुगाड करकर इसे विकसित किया तब से आज तक आम जनता को प्रति वर्ष इसका दर्शन कराया जाता है।जैन सिद्धांत भवन में लगभग 600 पुस्तकें , ताड़पत्रियां, कर्मलीय ग्रंथ, बोधगम,प्राकृत,पाली,संस्कृत,मराठी,तमिल,बंगला,गुजराती,जर्मन, इटेलियन,फ्रेंच आदि भाषा से जुड़े पांडुलिपि और पुस्तकें है।
सहायक लाइब्रेरियन रवि शंकर उपाध्याय बताते है की 15वीं और 16वीं शताब्दी की अधिकांश लिपि है।कलाकृति और प्राचीन सिक्के भी है इसके साथ साथ नवाब वाजिद अली शाह के दरबारी चित्रकार अब्दुल गनी व चित्रकार सुबोध कुमार जैन की कलाकृतियां भी सहेज कर रखीं गई है।
इस लाइब्रेरी में डॉ नवीन टीवीच , हर्मन, जेकाड़ी,डॉ एस्ट्रा, प्रो डब्लू, नॉर्मैन,ब्राउन, प्रणिता चार्य, चारुकृति के अलावे पर देशी विदेशी विद्वान व शोधार्थी, लाभान्वित हुए हैं और होते भी है। सैकड़ों दुर्लभ पांडुलिपि का आज अस्तित्व खतरे में है क्योंकि वर्ष 1999 से इस लाइब्रेरी को सरकारी अनुदान मिलना बंद हो गया है पर लिपि, पांडुलिप, जैनिज्म आदि के मामले में आज भी अव्वल बना है।
