
आरा/भोजपुर (नरेंद्र सिंह)20 जून।बिलौटी का एनकाउंटर जगदीशपुर एस. डी. पी. ओ . और मृतक के बीच उभरे ईगो या यों कहें मान-सम्मान को लेकर हुआ है।इसका खुलासा स्थानीय लोगों और मृत भरत भूषण तिवारी के फेसबुक का विश्लेषण करने पर लगता है।साथ ही भोजपुर पुलिस द्वारा इस संदर्भ में जारी प्रेस विज्ञप्ति से इसको बल मिलता है।
इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि का अवलोकन करने पर उपरोक्त बातों के संदर्भ में जो जानकारी प्राप्त हो रही है के अनुसार कभी पैदल चलकर बागेश्वर धाम बाबा का दर्शन करने वाला साथ ही जवनियां गांव के विस्थापितों के बीच अपने घर का अनाज वितरित करने तथा जगह जगह मौखिक और पत्राचार के जरिए उनकी समस्याओं को उठाने वाला भारत भूषण तिवारी तब मानसिक रूप से ज्यादा तनाव में आया जब उसको जगदीशपुर एसडीपीओ के चैंबर में सार्वजनिक रूप से बेइज्जत किया गया।हालांकि अन्य पदाधिकारियों के कार्यालयों में जाने पर ऐसे दुर्व्यवहार का सामना भरत को नहीं करना पड़ता था।
अपनी बेइज्जती के बाद वो बावला हो गया और फिर अपने फेसबुक से एसडीपीओ को गाली देने लगा और धमकाने लगा।फिर उसी तनाव के बीच अपने गले का लॉकेट बेचकर उसने हथियार खरीदा।बाद का घटनाक्रम सार्वजनिक है।इधर एसडीपीओ भी इसी ताक में थे की कैसे इस मनबढ़े युवक को कठिन से कठिन दंड दिया जाए या फिर उसकी औकात दिखाई जाए।मृतक तिवारी गाली देने से बाज नहीं आ रहा था और उधर एसडीपीओ अपनी बेइज्जती को लेकर खून का घूट पी रहे थे।
ये रस्सा कस्सी दोनों के बीच कई दिनों से चालू था।कहा तो यहां तक जा रहा है की क्रांतिकारी विचार रखने वाला मृतक तिवारी को हथियार किसी के इशारे पर कुछ लोगों ने खरीदवा दिया।ताकि जिद्दी तिवारी हथियार के साथ खुलकर प्रर्दशन करे और मौका बने।यहां गौर करने वाली बात यह भी है की जब प्रथम दिन पुलिस मृतक के घर गई लगभग तीन चार घंटे रही पुलिस चाहती तो उसके धमकाने के बाद भी चुपचाप परिवार से मिलकर गुप्त तरीके से तिवारी को दबोच सकती थी जबकि पुलिस घर में बैठ कर आमने सामने होकर उससे बातें करती रही और फिर लौट गई।लोग बताते है की भोजपुर पुलिस की तरफ से तब तक एक प्रेस विज्ञप्ति निकल चुका था मानसिक रूप से विक्षिप्त इस युवक को किसी तरह की हानि नहीं पहुंचाते हुए अपने वश में करके उसे मानसिक आरोग्यशाला पहुंचा दिया जाए पर हुआ उल्टा एनकाउंटर हुआ और तिवारी की हत्या हो गई।
परिजन भी कहते हैं की एक गहरी साजिश के तहत एनकाउंटर के नाम पर हमारे पुत्र की हत्या की गई है जिसका कोई आपराधिक चरित्र नहीं है लेकिन वो व्यवस्था के विरुद्ध बगावती तेवर रखता था।क्षेत्र में चल रही चर्चाओं के अनुसार मृतक तिवारी जवनियां गांव के विस्थापितों के लिए (जिसमें सभी जाती के है) लड़ाई लड़ते लड़ते काफी लोकप्रिय हो चुका था इसकी लड़ाई के चलते विस्थापितों के बीच बिजली पहुंची,रास्ता नहीं था तो सुगम रास्ता बना।
बरहाल मृतक तिवारी स्थानीय राजनीति , पुलिस प्रशासन व भ्रष्ट नेताओं के गठजोड़ को नहीं समझ सका और गहरी साजिश का शिकार एनकाउंटर के रूप में हुआ और इगो वाले का मकसद पूरा हो गया।

