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डीएई के सचिव और एईसी के अध्यक्ष ने तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन का दौरा करते हुए दुनिया के सबसे पुराने चालू बिजली रिएक्टरों की सराहना की।

डीएई के सचिव और एईसी के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने तारापुर साइट का दौरा करते हुए परमाणु ऊर्जा मिशन के प्रति एनपीसीआईएल के समर्पण की सराहना की।

विश्व के सबसे पुराने कार्यरत वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा रिएक्टर हैं तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन (टीएपीएस) की इकाइयां 1 और 2 का उद्घाटन 1969 में हुआ।

स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के कारण इनकी आयु लगभग 10 वर्षों तक बढ़ाई जा सकती है; परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड ने टीएपीएस 1 और 2 के निरंतर संचालन को मंजूरी दी।

तारापुर साइट, प्रौद्योगिकी अधिग्रहण से लेकर विकसित भारत के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता तक भारत की प्रगति दर्शाती है।

RKTV NEWS/ नई दिल्ली 17 जून।परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने आज तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन (टीएपीएस) का दौरा किया और दुनिया के सबसे पुराने कार्यरत ट्विन रिएक्टरों, टीएपीएस 1 और 2 के हाल ही में स्वीकृत 10 साल के जीवन विस्तार की समीक्षा की।
डॉ. मोहंती ने न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कर्मचारियों से बातचीत की और भारत के पहले परमाणु ऊर्जा स्टेशन के सुरक्षित, विश्वसनीय और कुशल संचालन को सुनिश्चित करने के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। इस यात्रा के दौरान, डॉ. मोहंती ने एनपीसीआईएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) वी. राजेश की उपस्थिति में प्राइमरी कूलेंट पंप टेस्ट फैसिलिटी (पीसीपीटीएफ) का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर डॉ. मोहंती ने कहा, “विश्व के सबसे पुराने चालू परमाणु रिएक्टरों, टीएपीएस यूनिट 1 और 2 का निरंतर संचालन, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और संचालकों की पीढ़ियों के समर्पण और हमारी नियामक एवं तकनीकी क्षमताओं की परिपक्वता का प्रमाण है। एक दशक का यह विस्तारित जीवनकाल, प्रौद्योगिकी अधिग्रहण से तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर भारत के परिवर्तन को दर्शाता है और एक सतत एवं ऊर्जा-स्वतंत्र विकसित भारत के निर्माण की हमारी क्षमता में विश्वास जगाता है।”
भारत के परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में तारापुर का एक अनूठा स्थान है। 1969 में शुरू हुए टीएपीएस 1 और 2 ने देश में वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा उत्पादन की शुरुआत की और सोवियत संघ के बाहर एशिया का पहला परमाणु ऊर्जा केंद्र तारापुर को स्थापित किया। पिछले साढ़े पांच दशकों में, इस केंद्र ने भारत की परमाणु इंजीनियरिंग क्षमताओं, परिचालन पद्धतियों और सुरक्षा संस्कृति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
एनपीसीआईएल द्वारा निरंतर नवाचार और सुरक्षा सुधारों पर जोर देते हुए, राजेश ने कहा कि “तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन की इकाइयाँ 1 और 2 परमाणु सुरक्षा और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। निरंतर उन्नयन, नवाचार और एक मजबूत सुरक्षा संस्कृति के माध्यम से, ये इकाइयाँ अग्रणी प्रतिष्ठानों से सफलतापूर्वक ऐसे सुदृढ़ परिसंपत्तियों में परिवर्तित हो गई हैं जो राष्ट्र के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों का समर्थन करती हैं।”
परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड द्वारा टीएपीएस 1 और 2 के निरंतर संचालन को दी गई हालिया मंजूरी भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह मंजूरी व्यापक जीवन-विस्तार और आधुनिकीकरण कार्यक्रम के बाद दी गई है, जिसे सख्त नियामक निगरानी में और सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए चलाया गया है।
इस उपलब्धि के महत्व के बारे में बताते हुए तारापुर, महाराष्ट्र साइट के निदेशक अजय कुमार भोले ने कहा, “टीएपीएस 1 और 2 का सफल जीवन विस्तार और आधुनिकीकरण एनपीसीआईएल की तकनीकी परिपक्वता और सुरक्षा पर इसके अटूट ध्यान को दर्शाता है। ‘शून्य हानि’ के सिद्धांत के साथ परियोजना का क्रियान्वयन यह प्रदर्शित करता है कि कैसे पुराने परमाणु संयंत्रों को वर्तमान नियामक और तकनीकी अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए पुनर्जीवित किया जा सकता है।”

जीवन विस्तार कार्यक्रम में महत्वपूर्ण प्रणालियों और घटकों का व्यापक निरीक्षण, नवीनीकरण, प्रतिस्थापन और जीर्णोद्धार, रिएक्टरों को आपस में जोड़ने का मूल्यांकन के लिए उन्नत स्वदेशी प्रौद्योगिकियों को काम में लगाने, विद्युत प्रणालियों का आधुनिकीकरण और दीर्घकालिक परिचालन विश्वसनीयता और सुरक्षा को और बढ़ाने के लिए उपायों का कार्यान्वयन शामिल था। वर्षों से, टीएपीएस 1 और 2 ने 100 अरब यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली का उत्पादन किया है, जिससे राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान मिला है और 86 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के समतुल्य उत्सर्जन से बचा जा सका है।

टीएपीएस 1 और 2 की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, टीएपीएस 1 और 2 के स्टेशन निदेशक विनय थट्टे ने कहा, “टीएपीएस 1 और 2 ने भारत की परमाणु इंजीनियरिंग क्षमताओं को आकार देने में मूलभूत भूमिका निभाई है। स्वदेशी नवाचारों से लेकर उन्नत निरीक्षण और सुरक्षा सुधारों तक, यह स्टेशन वृद्धावस्था प्रबंधन और सतत परमाणु संचालन के लिए एक आदर्श के रूप में कार्य करता है।”
तारापुर भारत का पहला वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा केंद्र मात्र नहीं है। यह हमारी वैज्ञानिक दूरदृष्टि, इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक है। टीएपीएस 1 और 2 के निरंतर संचालन की मंजूरी यह दर्शाती है कि सुव्यवस्थित परमाणु संयंत्र, निरंतर आधुनिकीकरण और कठोर सुरक्षा निगरानी के साथ, दशकों तक सुरक्षित और कुशलतापूर्वक राष्ट्र की सेवा कर सकते हैं।
टीएपीएस 1 और 2 का निरंतर संचालन स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है, साथ ही देश की सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों में से एक की विरासत को संरक्षित करता है।
जैसे-जैसे भारत ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना की ओर आगे बढ़ रहा है, परमाणु ऊर्जा की भूमिका विश्वसनीय, चौबीसों घंटे और कम कार्बन उत्सर्जन वाली बिजली उपलब्ध कराने में लगातार महत्वपूर्ण होती जाएगी।

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