नक्सवोमिका (होमियोपैथी)
जे खइले बा गरम मसाला, ना होखे झाड़ा खुलासा,
करस कतनो उहाँ उपायी,
किसीम-किसीम के फंकी फाकस, खात रहस रोजे-रोज दवाई।
मेहनत करे से जेकरा लागे शरम बइठल पियत रहे दारू आ, चाय गरमा-गरम ।
रात में नींद ना बढ़िया होखे,
होत बिहान त रहस सूतल,
ईर्षा में ऊ जलते रहस,
क्रोध से रहस भरल।
सपना में भी सुख ना देखस,
देखस हर घटना, दुर्घटना के; कुत्ता-बिल्ली रहे खदेरत,
सपना में भी उनका के।
केहूँ कटलस बात जे उनकर, गुस्सा से भर जइहें;
झगड़ा त र्ह मोल खरीदस, बरतन बासन तक भी तोड़िहें।
सल्फर इनकर दोस्ते हउवे, दुश्मन ह जिंकम;
आगे-पीछे दोस्त के रखीह, बचिहऽ दुश्मन से हरदम।
नक्सवोमिका दीही भगायीं, सब रोगन के ई लक्षण में;
बोल हरदम शिव-शिव, बोल शिव भोले बम-बम।


