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भोजपुर:हिंदू-उर्दू जुबान के नामचीन शायर डॉ.बशीर बद्र के निधन पर जन संस्कृति मंच ने व्यक्त की शोक संवेदना

RKTV NEWS/आरा (भोजपुर)29 मई।कल 28 मई को हिंदू-उर्दू जुबान के नामचीन शायर डॉ.बशीर बद्र नहीं रहे। लंबे समय तक स्मृतिलोप जैसी बीमारी से जूझते हुए उन्होंने लगभग 91 साल की उम्र में भोपाल स्थित अपने आवास पर आखिरी साँसें ली।
जन संस्कृति मंच, आरा-भोजपुर ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। जसम, बिहार के अध्यक्ष कवि जितेंद्र कुमार ने उन्हें याद करते हुए कहा कि डॉ. बशीर बद्र के इंतकाल से देशभर में ‘अम्न-ओ-अमान’ की आवाज़ को सदमा पहुँचा है। उनके शेरों व गजलों को भारत हीं नहीं बल्कि दुनिया के कई मुल्कों में पसंद करनेवाले लोग हैं।
कवि सुमन कुमार सिंह ने कहा कि सीधे-सरल शब्दों में अपनी मीठी जुबान से बशीर बद्र ने गांगी-जमुनी तहजी़ब की भरपूर नुमाइंदगी की। वे उत्तर प्रदेश के अयोध्या क्षेत्र में जन्मे व पले-बढे़। नफरत व नाउम्मीदी के दौर में भी उनकी संवेदशीलता काबीले गौर रही है :-
“हुकूमत जंग का माहौल पैदा कर रही है,
अयोध्या में कोई हिन्दू न मुसल्मान रहता है।”
और फिर कि :-
“बनाए जो ख़ुदा को भी, वो हिन्दू भी तो देखा है,
अयोध्या जा के देखा तो वो उर्दू भी तो देखा है।”
बशीर बद्र ने अपनी रचनाओं में आम-आवाम की फिक्र की। उनके भीतर कोई आक्रोश नहीं बल्कि मानवीय मूल्यों को लेकर गहरी चिंता रही। उन्होंने अमन, भाईचारा और रिश्तों की मजबूती व मकबूलियत को खूब तरजीह दी। आम-आवाम की पीड़ा उनके शायरी में घुली-मिली रही। 1987 में मेरठ के दंगे में जब उन्होंने अपना घर खो दिया, वह पीड़ा आवाम की पीड़ा बन गई –
“लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में।”
बशीर बद्र को उनके साहित्यिक योगदान के लिए भारत सरकार की ओर से 1999 में ‘पद्मश्री’ सम्मान से नवाज़ा गया था। मुसाफिर,आमद,इमेज,इकाई तथा कल्चर यक्सन उनके हिंदी-उर्दू गजलों की प्रमुख किताबें हैं। इन किताबों से अधिक वे लोगों की जुबान पर रहे हैं। वे मुहब्बत को पेश करते हैं तो कहते हैं :-
“मोहब्बत एक ख़ुशबू है हमेशा साथ चलती है
कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता”
और जब दुनिया-जहां की चिंता करते हुए इस दौर को परखने की कोशिश करते हैं तो कहते हैं :-
“फिर से ख़ुदा बनाएगा कोई नया जहाँ
दुनिया को यूँ मिटाएगी इक्कीसवीं सदी”

कहानीकार डा. सिद्धनाथ सागर, पत्रकार प्रशांत कुमार, रंगकर्मी-पत्रकार शमशाद प्रेम, अरुण प्रसाद,सूर्यप्रकाश, धनंजय सिंह, सूर्यप्रकाश, अमित मेहता, विक्रांत कुमार, अंशु राजा ,सुनील चौधरी और सुनील श्रीवास्तव आदि ने भी जसम, आरा की ओर से बशीर बद्र को श्रद्धांजलि व्यक्त की।

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